उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक अवैध कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण, कंप्यूटर सिस्टम और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी करने के लिए किया जाता था। इस रैकेट से जुड़े लोगों ने अपनी पहचान छुपाने और तकनीकी माध्यमों का दुरुपयोग करके विदेशियों को तकनीकी सहायता या अन्य फर्जी सेवाओं के नाम पर भारी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। इस पूरी कार्रवाई से स्थानीय पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है क्योंकि इस प्रकार के अवैध नेटवर्क लगातार शहर के विभिन्न हिस्सों में पैर पसार रहे थे और आम नागरिकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहे थे।
हाल के दिनों में देश के कई बड़े महानगरों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में भी साइबर अपराधियों द्वारा अवैध कॉल सेंटर संचालित करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। ये गिरोह बेहद शातिर तरीके से विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिकी और यूरोपीय देशों के लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। इसके लिए वे विभिन्न प्रकार के संचार माध्यमों और वीओआइपी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी वास्तविक लोकेशन का पता न चल सके। लखनऊ पुलिस और साइबर सेल की टीमें पिछले कुछ समय से ऐसे ठिकानों पर विशेष नजर बनाए हुए थीं, क्योंकि इस तरह की अवैध गतिविधियों से न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल उठते हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों का दायरा भी बढ़ता है। इस तरह के नेटवर्क आमतौर पर किराए के परिसरों में गुप्त रूप से चलाए जाते हैं, जहां बेरोजगार युवाओं को अधिक वेतन का लालच देकर इस प्रकार के गैरकानूनी कृत्यों में शामिल किया जाता है।
इस ताजा कार्रवाई के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि इस अवैध कॉल सेंटर के तार देश के अन्य हिस्सों या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं या नहीं। पूछताछ के दौरान पकड़े गए आरोपियों से कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे इस नेटवर्क के अन्य सहयोगियों और मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मदद मिलेगी। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ठिकानों पर लगातार हो रही छापेमारी से साइबर अपराधियों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन इस समस्या से पूरी तरह निपटने के लिए नागरिकों में जागरूकता और तकनीकी निगरानी दोनों को बेहद मजबूत करने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की संपत्तियों और बैंक खातों की भी वित्तीय जांच कर सकती है ताकि अवैध रूप से कमाई गई संपत्ति को जब्त किया जा सके।