वीरांगना चौक पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के स्पष्ट निर्देशों के बाद स्थानीय पुलिस और साइबर थाना दल की टीम क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी नियमित गश्त के दौरान पुलिस बल को विशेष सूचना मिली कि कैंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वीरांगना चौक के पास एक संदिग्ध व्यक्ति खड़ा है। यह संदिग्ध व्यक्ति बैंक खातों और कमीशन के लेनदेन को लेकर किसी अज्ञात व्यक्ति से फोन पर बातचीत कर रहा था। इस पुख्ता सूचना के आधार पर उपनिरीक्षक कपिल राघव के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर त्वरित घेराबंदी की। पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी करते हुए उस संदिग्ध व्यक्ति को मौके से ही धर दबोचा। पूछताछ के दौरान पकड़े गए इस संदिग्ध व्यक्ति की पहचान जाबिर खान के रूप में की गई है। आरोपी जाबिर खान की उम्र 34 वर्ष बताई गई है और वह मूल रूप से बदायूं जिले के बिनावर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिछरुइया गांव का रहने वाला है। पुलिस की इस सफल घेराबंदी और त्वरित कार्रवाई से साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का सुराग मिला है। मौके पर पुलिस ने आरोपी के पास से एक वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
मोबाइल फोन से मिले धोखाधड़ी के डिजिटल सबूत
पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपी जाबिर खान के पास से बरामद किए गए वीवो मोबाइल फोन की जब तकनीकी जांच की गई, तो उसमें से कई सनसनीखेज खुलासे सामने आए। मोबाइल फोन की व्हाट्सऐप चैट खंगालने पर पुलिस को विभिन्न बैंक खातों के संचालन और कमीशन के भारी लेनदेन से जुड़ी कई संदिग्ध बातचीत के स्क्रीनशॉट और चैट मैसेज मिले। इसके अलावा पुलिस ने मोबाइल की गैलरी से कई अलग-अलग लोगों के पैन कार्ड, यूपीआई क्यूआर कोड और विभिन्न बैंकों की पासबुक की तस्वीरें भी बरामद कीं। तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपी की जेब से एक कागज की पर्ची भी अपने कब्जे में ली, जिस पर स्पष्ट रूप से दो अलग-अलग बैंक खातों के नंबर लिखे हुए थे। जब पुलिस ने इन कागजी पर्ची और मोबाइल में दर्ज बैंक खातों की तकनीकी जांच की, तो हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस के मुताबिक इनमें से एक बैंक खाते का सीधा कनेक्शन तमिलनाडु में दर्ज एक साइबर फ्रॉड के मामले से जुड़ा पाया गया। वहीं दूसरे बैंक खाते की जांच करने पर उसका संबंध दिल्ली में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के एक अन्य आपराधिक मामले से निकला है। आरोपी इन सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के जरिए साइबर अपराधियों को लगातार मदद पहुंचा रहा था।
दिल्ली के साइबर अपराधियों से जुड़ा पुराना आपराधिक इतिहास
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी जाबिर खान ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह भोले-भाले या अन्य जरूरतमंद लोगों के बैंक खाते, चेकबुक, एटीएम कार्ड और सक्रिय यानी एक्टिव सिम कार्ड विभिन्न माध्यमों से जुटाता था। इन सभी अवैध रूप से एकत्रित किए गए बैंकिंग संसाधनों और सिम कार्डों को वह दिल्ली के सक्रिय साइबर अपराधियों को तयशुदा कमीशन पर उपलब्ध कराता था। दिल्ली के ये शातिर साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल जनता से ठगी गई रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते थे। पुलिस रिकॉर्ड की छानबीन से यह भी पता चला है कि आरोपी जाबिर खान कोई नया अपराधी नहीं है, बल्कि वह पहले भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है। वह पूर्व में गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट के साइबर थाने की पुलिस द्वारा गिरफ्तार होकर जेल की हवा खा चुका है। इस बार साइबर क्राइम थाना पुलिस ने आरोपी जाबिर खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 318 की उपधारा 4 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम यानी आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वर्तमान में पुलिस इस शातिर आरोपी से जुड़े तमाम बैंक खातों के डिजिटल ट्रांजैक्शन की बहुत गहराई से जांच कर रही है।