स्वरूपनगर के बुजुर्ग डॉक्टर को बनाया निशाना
कानपुर के स्वरूपनगर इलाके में रहने वाले एक बत्तर साल के बुजुर्ग डॉक्टर को अपराधियों ने अपनी ठगी का बहुत बड़ा शिकार बनाया है। इस मामले में साइबर अपराधियों ने डॉक्टर साहब को किसी फर्जी आपराधिक मुकदमे में फंसाने का खौफ दिखाया। अपराधियों ने डॉक्टर को यह भी डराया कि उनके नाम आए किसी पार्सल में अवैध सामग्री मिली है। ऐसी डरावनी धमकियां देकर ठगों ने डॉक्टर को लगातार एक हफ्ते तक पूरी तरह से डिजिटल अरेस्ट करके रखा था। डिजिटल अरेस्ट की इस फर्जी कैद के दौरान शातिर अपराधियों ने डॉक्टर पर लगातार मानसिक दबाव बनाया और उनसे पैंतालीस लाख से अधिक यानी कुल अड़तालीस लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ित डॉक्टर की शिकायत के आधार पर पुलिस विभाग ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम ने इस सनसनीखेज वारदात में शामिल एक महिला समेत कुल तीन शातिरों को धर दबोचा है। पकड़े गए इन आरोपियों से पुलिस की टीम लगातार पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों का भी पता चल सके। डॉक्टर के साथ हुई इस बड़ी ठगी से इलाके के अन्य लोगों में भी काफी डर और हैरानी का माहौल पैदा हो गया है।
म्यूल खातों के जरिए खपाई गई ठगी की रकम
पुलिस की वित्तीय जांच में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि इस शातिर गिरोह ने ठगी की भारी-भरकम राशि को छिपाने के लिए बहुत चालाकी से काम किया था। अपराधियों ने इस अवैध रूप से लूटी गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए दर्जनों म्यूल यानी किराए के फर्जी बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। जैसे ही पीड़ित डॉक्टर के बैंक खातों से यह मोटी रकम इन ठगों के खातों में पहुंचती थी, वैसे ही खेल शुरू हो जाता था। शातिर लोग इस राशि को तुरंत अलग-अलग और छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर कई अन्य खातों में तेजी से घुमा देते थे। इसके बाद इस घुमाई गई रकम को एटीएम मशीनों और यूपीआई माध्यमों का इस्तेमाल करके तुरंत निकाल लिया जाता था ताकि पैसों का कोई पक्का सुराग पुलिस के हाथ न लग सके। वित्तीय लेनदेन के इस जाल को देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए हैं क्योंकि पैसे को बहुत ही सुनियोजित तरीके से इधर-उधर ट्रांसफर किया गया था। पुलिस की साइबर सेल और वित्तीय जांच इकाइयां अब इन सभी संदिग्ध बैंक खातों और उनमें हुए लेनदेन का पूरा ब्यौरा खंगालने में जुटी हुई हैं। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की पहचान भी तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
मास्टरमाइंड की तलाश और पुलिस की दबिश
साइबर पुलिस की विशेष टीम अब इस खतरनाक गिरोह के मुख्य सरगना यानी मास्टरमाइंड की तलाश में लगातार जुटी हुई है। इसके अलावा पुलिस उन लोगों को भी ढूंढ रही है जिन्होंने अपराधियों को ये सभी म्यूल बैंक खाते मुहैया कराए थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के मददगारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी तरह के डिजिटल अरेस्ट या फर्जी मामलों की धमकी से डरे नहीं। इस तरह की वारदातों से बचने के लिए लोगों को तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देनी चाहिए ताकि समय रहते उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके। पुलिस टीम अब पकड़े गए तीनों आरोपियों से मिले सुरागों के आधार पर आगे की छापेमारी की कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह के कुछ और सदस्यों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पूरी कार्रवाई से साइबर अपराधियों के बीच हड़कंप मच गया है और पुलिस इस तरह के अन्य मामलों की भी नए सिरे से पड़ताल कर रही है।