रविवार सुबह की घटना और व्यापारी का अपहरण
राष्ट्रीय राजधानी के जामा मस्जिद क्षेत्र से एक चौंकाने वाली वारदात प्रकाश में आई है जहाँ रविवार की सुबह लगभग 5:30 बजे एक व्यक्ति को जबरन वाहन में बिठा लिया गया। पीड़ित व्यक्ति उस इलाके में घूम-घूमकर घड़ियां बेचने का काम करता था और अवैध तरीके से अपना कारोबार चला रहा था। आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से उसे अपने जाल में फंसाया और सुनियोजित षड्यंत्र के तहत इस घटना को अंजाम दिया। सुबह के वक्त जब सड़कों पर आवाजाही कम थी, तब इस संगीन जुर्म को पूरा किया गया। जिस गाड़ी में पीड़ित को बैठाया गया था, उसी वाहन में उसे चारों तरफ घुमाया गया ताकि उसे पूरी तरह भयभीत किया जा सके। इस पूरी योजना की जड़ में एक गांव का परिचित शामिल था जिसने इस व्यापारी के बारे में सारी गोपनीय जानकारी साझा की थी। जामा मस्जिद के मुख्य द्वार के समीप से ही इस अपहरण को अंजाम दिया गया जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पीड़ित को गाड़ी के भीतर ही कानून का खौफ दिखाया गया और उसकी रिहाई के एवज में भारी रकम की मांग की जाने लगी। आरोपियों का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह से पीड़ित से जबरन पैसे ऐंठना था और इसके लिए उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी थी।
फिरौती की मांग और दोस्त की सजगता से खुला राज
अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित व्यापारी से अपनी रिहाई के लिए कुल डेढ़ लाख रुपये की बड़ी रकम का भुगतान करने को कहा। इतनी भारी राशि का प्रबंध करने के लिए बेचारे व्यापारी ने अपने एक परिचित मित्र से तुरंत संपर्क साधा और मदद की गुहार लगाई। जैसे ही पीड़ित के दोस्त को रकम सौंपने के सिलसिले में बार-बार स्थान बदलने के निर्देश मिले, उसके मन में गंभीर संदेह पैदा हो गया। उसे यह समझते देर नहीं लगी कि दाल में कुछ काला है और उसके दोस्त को किसी बड़ी मुसीबत में फंसा दिया गया है। बिना एक पल गंवाए उस सतर्क दोस्त ने तुरंत मामले की पूरी जानकारी स्थानीय थाना पुलिस को दे दी। अपहरण की इस गंभीर सूचना को मिलते ही कोतवाली थाने के सुरक्षा कर्मियों ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस टीम ने आधुनिक तकनीक और तकनीकी जानकारियों का पूरा इस्तेमाल करते हुए अपराधियों की गतिविधियों का सुराग लगाना शुरू कर दिया। लगातार पक्के सबूत जुटाने के बाद पुलिस की टीम सीधे उस मुख्य आरोपी सिपाही तक जा पहुंची जिसने इस पूरे षड्यंत्र का तानाबाना बुना था। रविवार के ही दिन पुलिस ने मुख्य आरोपी सिपाही को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी।
पुलिस की कार्रवाई और दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी
सख्त पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी सिपाही की निशानदेही पर पुलिस ने उसके दूसरे साथी को भी दबोचने में बड़ी सफलता हासिल कर ली। इस सनसनीखेज मामले में शामिल दोनों आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका कितनी थी, पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच-पड़ताल कर रही है। मूल रूप से इस आपराधिक साजिश का सूत्रधार सिपाही का ही एक साथी था जो उसके गांव में रहता था और उसी ने व्यापारी के बारे में सारी खबर दी थी। उस ग्रामीण साथी ने ही बताया था कि वह व्यापारी खुलेआम घूमकर घड़ियां बेचता है और कानूनी कार्रवाई के डर से आसानी से पैसे दे देगा। इसी एक जानकारी के आधार पर खाकी वर्दी वाले ने अपने साथी के साथ मिलकर वसूली का पूरा खाका तैयार किया था। हालांकि पुलिस की मुस्तैदी और तकनीकी सर्विलांस के आगे उनकी एक न चली और दोनों कानून के शिकंजे में कसते चले गए। एक रक्षक द्वारा ही भक्षक बनने की इस घटना ने सबको हैरान कर दिया है और महकमे की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इन दोनों ने पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को इस तरह से अपना शिकार बनाया था या नहीं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से जारी है और दोनों आरोपियों को उचित सजा दिलाने के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।