बागपत में तस्कर की गिरफ्तारी की घटना
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थानीय पुलिस ने वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के दौरान एक शातिर तस्कर को रंगे हाथों पकड़ने में सफलता हासिल हुई है। आरोपी व्यक्ति नहर के इलाके से अवैध रूप से कछुए पकड़ने का काम कर रहा था। पुलिस को इस संबंध में गुप्त सूचना मिली थी जिसके आधार पर त्वरित टीम गठित की गई। पुलिस दल ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी की और संदिग्ध को धर दबोचा। तलाशी के दौरान उसके पास से कई जीव जप्त किए गए हैं जिन्हें अवैध तरीके से पानी के स्रोतों से पकड़ा गया था। पकड़े गए आरोपी से पुलिस थाने में गहन पूछताछ की जा रही है ताकि उसके अन्य साथियों के बारे में भी सुराग मिल सके। यह पूरी कार्रवाई स्थानीय कानून व्यवस्था बनाए रखने और वन्य जीवों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए की गई है। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
कछुओं को दिल्ली ले जाकर बेचने की योजना
प्रारंभिक पूछताछ और शुरुआती तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि आरोपी इन मूक जीवों को उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाने की योजना बना रहा था। तस्कर की मंशा इन कछुओं को देश की राजधानी दिल्ली के बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचने की थी। दिल्ली और आसपास के इलाकों में अवैध वन्यजीवों और विशेषकर कछुओं की मांग होने की बात कही जाती है जिसका फायदा उठाने की कोशिश यह तस्कर कर रहा था। आरोपी ने नहर के पानी से इन जीवों को जाल या अन्य माध्यमों से पकड़ा था ताकि इन्हें सुरक्षित रूप से अन्यत्र ले जाया जा सके। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के पास से बरामद किए गए सभी कछुओं को सुरक्षित हालत में कब्जे में ले लिया गया है। वन विभाग के अधिकारियों को भी इस पूरी घटना की आधिकारिक सूचना दे दी गई है ताकि नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके। इस प्रकार की अवैध गतिविधियों से पर्यावरण और जलीय जीव जंतुओं के संतुलन पर बुरा असर पड़ता है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस तस्करी के नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और यह व्यक्ति कब से इस गैरकानूनी कार्य को अंजाम दे रहा था।
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कड़े नियम और पृष्ठभूमि
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत विभिन्न प्रजाति के जीवों का शिकार करना, उन्हें पकड़ना या उनकी खरीद फरोख्त करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध माना जाता है। कछुओं की कई प्रजातियां इस अधिनियम के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं और इन्हें पकड़ना कानूनन जुर्म है। इसके बावजूद अवैध शिकारी और तस्कर पैसों के लालच में इस प्रकार के गैरकानूनी कृत्यों को अंजाम देने से बाज नहीं आते हैं। इस तरह के मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ अदालतों में कड़े मुकदमे चलाए जाते हैं जिनमें भारी जुर्माने और लंबी सजा का प्रावधान होता है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि जलीय जीवों के विलुप्त होने से प्राकृतिक जल स्रोतों की स्वच्छता और पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त गश्त तथा सतर्कता के कारण अक्सर ऐसे तस्कर कानून की गिरफ्त में आ जाते हैं। बागपत की यह ताजा घटना भी इसी सतर्कता का परिणाम है जिसके कारण एक बड़े वन्यजीव तस्करी के प्रयास को समय रहते विफल कर दिया गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस दिशा में अपनी निगरानी और अधिक सख्त करने की तैयारी कर रहा है ताकि ऐसे अपराधों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।