वेव सिटी थाने में दर्ज हुआ धोखाधड़ी का नया मामला
गाजियाबाद जिले के वेव सिटी थाने में अदालत के आदेश पर एक महिला पुलिसकर्मी समेत कुल चार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इस सनसनीखेज मामले में नामजद आरोपियों की पहचान दिव्या, विकास, राजकुमार और मोहम्मद तालीम के रूप में की गई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि इन सभी ने मिलकर उनके बीमार बेटे के इलाज के लिए रखे गए पैसों पर हाथ साफ किया है। शुरुआती दौर में जब पीड़ित परिवार अपनी शिकायत लेकर स्थानीय पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचा था, तब उनकी किसी ने सुनवाई नहीं की और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया गया। स्थानीय पुलिस की इस कथित निष्क्रियता और टालमटोल के रवैये से आहत होकर पीड़ित परिवार ने न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में दी गई शिकायत और सबूतों का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश ने इस गंभीर मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत के इस स्पष्ट निर्देश के बाद ही वेव सिटी थाने की पुलिस हरकत में आई और सभी चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया। एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि अदालत के आदेशों का पालन करते हुए मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस विभाग अब इस धोखाधड़ी प्रकरण में कानूनी प्रावधानों के तहत गहनता से अपनी जांच-पड़ताल आगे बढ़ा रहा है।
मोबाइल से खाते की जानकारी चुराकर निकाले गए दस लाख रुपये
इस पूरी घटना का विवरण बेहद चौंकाने वाला है जिसमें आरोपियों ने पहले पीड़ित परिवार का पूरी तरह से भरोसा जीता। आरोपितों ने इस भरोसे का फायदा उठाकर बड़ी चालाकी से उनके मोबाइल फोन से बैंक खाते की गुप्त जानकारी चुरा ली। पीड़ित परिवार की मुख्य व्यस्तता यह थी कि उनका बेटा गंभीर रूप से बीमार था और वे उसके इलाज तथा देखभाल में पूरी तरह जुटे हुए थे। इसी लाचारी और व्यस्तता का फायदा उठाकर आरोपियों ने 28 जनवरी से 22 फरवरी के बीच इस सुनियोजित वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित परिवार को जब इस अवैध निकासी का पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि यह सारा पैसा उनके बीमार बेटे के इलाज के लिए था। उन्होंने तुरंत अपनी शिकायत स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज करानी चाही लेकिन पुलिस ने शुरुआत में उनकी फरियाद को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। पुलिस स्तर से कोई मदद न मिलने पर मजबूरन पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत की शरण ली। अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और चोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया। अब एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल के नेतृत्व में पुलिस अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि मोबाइल से डेटा कैसे चोरी हुआ।
अदालत के आदेश पर पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
न्यायालय के निर्देश मिलने के तुरंत बाद वेव सिटी पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसीपी वेव सिटी प्रियाश्री पाल ने मीडिया और जनता को जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान जो भी नए तथ्य सामने आएंगे। उन्हीं मिले हुए ठोस तथ्यों और सबूतों के आधार पर पुलिस आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई को अंजाम देगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि किस तरह जरूरतमंदों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। जब एक परिवार अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए अस्पताल और डॉक्टरों के चक्कर काटने में व्यस्त था, तब उनके अपने ही खातों पर डाका डाला जा रहा था। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके के आम नागरिकों में भी भारी रोष और चिंता का माहौल बना हुआ है। पुलिस विभाग के अधिकारियों पर भी यह दबाव है कि वे इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें ताकि सच्चाई सामने आ सके। चूंकि आरोपी पक्ष में एक महिला पुलिसकर्मी का नाम भी शामिल है, इसलिए इस मामले की गंभीरता और अधिक बढ़ जाती है। अदालत के सख्त आदेश के बाद अब कानून अपना काम कर रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की एक बड़ी उम्मीद ब बंधी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच के नतीजे तय करेंगे कि आरोपियों के खिलाफ आगे अदालत में किस प्रकार की चार्जशीट पेश की जाएगी।