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रक्षा और सुरक्षा

रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: अब देश की प्राइवेट कंपनियां भी बनाएंगी मिसाइल, डीआरडीओ देगा उन्नत तकनीक

भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके तहत अब देश की प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां भी आधुनिक मिसाइलों के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाएंगी।

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Ankit Yadav
26 अग 2026, 12:34
रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: अब देश की प्राइवेट कंपनियां भी बनाएंगी मिसाइल, डीआरडीओ देगा उन्नत तकनीक
भारतीय रक्षा निर्माण क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाले निर्णय के तहत, देश के रक्षा मंत्रालय ने निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी मिसाइल निर्माण की अनुमति देने का बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से यह मंजूरी दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को रक्षा उपकरणों के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना और देश के भीतर ही हथियारों का उत्पादन बढ़ाना है। इस नीतिगत बदलाव से भारतीय रक्षा उद्योग में एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद जताई जा रही है, जहां सरकारी उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियाँ भी देश की सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने में कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगी।

डीआरडीओ साझा करेगा तकनीक

रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए देश का प्रमुख अनुसंधान संस्थान रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) अपनी अत्याधुनिक तकनीक निजी कंपनियों को हस्तांतरित करेगा। अभी तक मिसाइल निर्माण और उससे जुड़ी संवेदनशील तकनीकों पर सरकारी नियंत्रण और संस्थानों का ही एकाधिकार रहा है, लेकिन अब निजी क्षेत्र को भी इस तकनीकी ज्ञान तक सीधी पहुँच मिलेगी। डीआरडीओ द्वारा तकनीकी सहयोग मिलने से प्राइवेट कंपनियों को उन्नत और सटीक मिसाइल प्रणाली विकसित करने में भारी मदद मिलेगी, जिससे बिना किसी शुरुआती शोध में समय गंवाए वे सीधे उत्पादन चरण में प्रवेश कर सकेंगी। इस दूरदर्शी पहल से देश के भीतर ही एक मजबूत रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होने की पूरी संभावना है। सरकार लंबे समय से 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियानों के तहत रक्षा उत्पादन में निजी उद्यमों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही थी। इस ताज़ा फैसले से न केवल रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले साजो-सामान का उत्पादन भी तेज गति से हो सकेगा। इसके अलावा, इससे देश के युवाओं और इंजीनियरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और तकनीकी कौशल का विकास भी बड़े पैमाने पर सुनिश्चित किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों के आने से रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक मजबूत होगी। कई मित्र देश भारत से रक्षा उपकरणों की खरीद में गहरी रुचि दिखा रहे हैं और निजी क्षेत्र की दक्षता तथा उत्पादन क्षमता के जुड़ जाने से वैश्विक माँग को समय पर पूरा करना आसान हो जाएगा। आने वाले दिनों में रक्षा मंत्रालय इस योजना के तहत निजी कंपनियों के चयन और उनके साथ तकनीकी हस्तांतरण के समझौतों की रूपरेखा को अंतिम रूप देगा, जिससे देश की सैन्य और औद्योगिक ताकत में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जाएगी।
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