यूपी के सहारनपुर में मस्जिद गिराने का पूरा मामला जानिए, विपक्ष के नेताओं को हाउस अरेस्ट करने का आरोप
नेपाल की थेरांग नदी में बाढ़, बूढ़ीगंडकी अलर्ट पर: गोरखा में 4 घर और सस्पेंशन ब्रिज बहा; अब तक 1344 शव मिले...
पीएम मोदी ने विरोधियों को बताया 'नाराज़ फूफा', दिमाग़ी नक्सली का फिर किया ज़िक्र
नंदा देवी पर्वत से गायब हुआ परमाणु उपकरण: अमेरिका को शक-भारत ने चोरी कर ली, इसमें भरा प्लूटोनियम लीक हुआ तो...
UN ने बदला दुनिया का नक्शा, अमेरिका ने विरोध किया: नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; जानिए भारत पर इस...
मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन: 2 दिन का राजकीय शोक
ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों ने लिखी चिट्ठी, पूछा- क्या हम सिर्फ रिसर्च करेंगे
दिल्ली-NCR में आज फिर भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने इन राज्यों के लिए भी जारी की चेतावनी
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
बड़ी प्रशासनिक तैयारी: उत्तर प्रदेश में एक दिसंबर से शुरू होगी जनगणना और दर्ज होगी जातिगत जानकारी
उत्तर प्रदेश में आगामी एक दिसंबर से जनगणना की प्रक्रिया का आधिकारिक रूप से आगाज होने जा रहा है, जिसमें इतिहास में पहली बार नागरिकों से जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे और कुल 40 महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे।
A
Ankit Yadav
06 सित 2026, 14:51
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सूबे में प्रशासन ने एक नए और ऐतिहासिक अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। आने वाली एक दिसंबर से राज्यभर में जनगणना का महाअभियान शुरू किया जाएगा। इस बार की गणना पिछले सभी चरणों से काफी अलग और विशेष होने वाली है, क्योंकि प्रशासनिक तंत्र ने इसमें कई नए आयाम जोड़े हैं जो नीति निर्माण और सामाजिक कल्याण योजनाओं की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। राज्य के नागरिकों और विशेषकर लखनऊ के प्रशासनिक गलियारों में इस बात को लेकर काफी चर्चा और उत्सुकता का माहौल बना हुआ है कि यह प्रक्रिया जमीनी स्तर पर किस प्रकार क्रियान्वित की जाएगी।
पहली बार जुड़ेगा जातिगत आंकड़ों का अहम पहलू
इस व्यापक सर्वेक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पहली बार आधिकारिक तौर पर जातिगत जानकारी दर्ज की जाएगी। देश और प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए इस कदम को एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि जातिगत आंकड़ों के स्पष्ट हो जाने से समाज के हर वर्ग, पिछड़े तबकों और वंचित समूहों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ पहुंचाया जा सकेगा। इसके लिए गणना के दौरान विशेष प्रकार के फॉर्म और प्रारूप तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें प्रशिक्षित प्रगणक घर-घर जाकर भरेंगे ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश न बचे।
पूछे जाएंगे कुल 40 विस्तृत सवाल
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार प्रत्येक परिवार से साक्षात्कार के दौरान कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इन सवालों में न केवल बुनियादी जनसांख्यिकीय विवरण जैसे नाम, उम्र, शिक्षा और व्यवसाय शामिल होंगे, बल्कि आवास की स्थिति, आर्थिक दशा, संसाधनों की उपलब्धता और अब विशेष रूप से जातिगत पहचान से जुड़े बिंदु भी सम्मिलित किए जाएंगे। इतने विस्तृत प्रश्नों का उद्देश्य राज्य की सही और जमीनी तस्वीर सरकार के सामने लाना है, ताकि भविष्य के विकास कार्यक्रमों का खाका उसी के अनुरूप खींचा जा सके। लखनऊ सहित तमाम जिलों के जिला प्रशासन ने इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए कर्मचारियों और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देना भी शुरू कर दिया है।
प्रशासनिक तैयारियां और आम जनता की प्रतिक्रिया
जैसे-जैसे एक दिसंबर की यह तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रशासनिक स्तर पर बैठकों का दौर तेज हो गया है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय रहते सभी जरूरी संसाधन और प्रगणकों की टीमें तैयार कर लें ताकि अभियान के दौरान किसी तरह की प्रशासनिक बाधा न आए। वहीं दूसरी ओर, आम जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच इस बात को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसके क्रियान्वयन की बारीकियों पर नजर बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर, यह जनगणना उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है जिस पर देश भर की निगाहें टिकी रहेंगी।