अंबाला में भक्ति की धूम
अंबाला के विभिन्न मंदिरों में 12 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के पावन अवसर पर मां शैलपुत्री की विशेष पूजा का आयोजन किया गया। इस दिन का विशेष महत्व हिंदू धर्म में मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप को समर्पित है, जिन्हें शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। शहर भर के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और भक्त अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए कतारों में खड़े दिखाई दिए। लोगों ने पारंपरिक विधियों के साथ मां के इस प्रथम स्वरूप का आह्वान किया। मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया गया था जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बन गया। भक्तों ने मंदिरों में नारियल, चुनरी और धूप-दीप अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना की। इस दौरान मंदिरों में भक्ति गीतों और मंत्रों का उच्चारण पूरे दिन जारी रहा। स्थानीय निवासियों के अनुसार त्योहार को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और वे धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। सुबह के समय विशेष आरती के साथ उत्सव की शुरुआत हुई और भारी संख्या में परिवारों ने एक साथ दर्शन किए।
मंदिरों में गूंजे जयकारे
मंदिर परिसर के भीतर मां शैलपुत्री की आराधना के दौरान भक्तों द्वारा लगातार जयकारे लगाए गए। श्रद्धालु पूरे जोश के साथ देवी की स्तुति में लीन रहे और वातावरण देवी के गीतों से गुंजायमान हो उठा। मंदिरों में अनुष्ठान करने के लिए पहुंचे लोगों ने कहा कि मां शैलपुत्री का पूजन करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस अवसर पर मंदिरों के पुजारियों ने विशेष पूजा और हवन का प्रबंध किया था, जिसमें कई भक्तों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। सुरक्षा के दृष्टिगत कई मंदिरों में उचित प्रबंध किए गए थे ताकि भीड़ को व्यवस्थित रखा जा सके और दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। भक्तों के चेहरों पर खुशी और भक्ति की झलक स्पष्ट देखी जा सकती थी। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई थीं ताकि सभी सुगमता से माता के चरणों में अपनी भेंट समर्पित कर सकें। दिन भर मंदिरों के कपाट खुले रहे और निरंतर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा।
नवरात्रि पूजन का महत्व
पृष्ठभूमि के तौर पर देखा जाए तो नवरात्रि का यह त्योहार शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है और मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां शैलपुत्री का पूजन नवरात्रि के पहले दिन करने से साधक को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। धर्म के जानकारों के अनुसार नवरात्रि का हर दिन देवी के एक अलग स्वरूप को समर्पित होता है और भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और आत्म-मंथन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। अंबाला के मंदिरों में आज हुई यह विशेष पूजा न केवल स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था को प्रदर्शित करती है बल्कि यह हमारी संस्कृति के संरक्षण का भी प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं। आने वाले दिनों में नवरात्रि के दौरान मंदिरों में इसी तरह की भीड़ और धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी, जिसमें भक्त देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हुए अपनी श्रद्धा प्रदर्शित करेंगे।