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भव्य उत्सव: इस जन्माष्टमी पर कान्हा के श्रृंगार और झूलों पर 40,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगे लोग
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस बार देश भर में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। भक्त अपने प्रिय कान्हा के स्वागत के लिए किसी भी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहते हैं, जिसके चलते इस साल कुल खर्च चालीस हजार करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया है।
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Ankit Yadav
04 सित 2026, 16:57
देश भर में श्री कृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का त्योहार बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाने लगा है। इस साल इस पावन पर्व को लेकर बाजारों में जिस प्रकार की रौनक देखने को मिल रही है, उससे व्यापार जगत भी काफी उत्साहित है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को यादगार बनाने के लिए लोग दिल खोलकर खरीदारी कर रहे हैं। विशेष तौर पर छोटे बच्चों को बाल गोपाल के रूप में सजाने और उनके लिए विशेष चीजें खरीदने का क्रेज लोगों में सिर चढ़कर बोल रहा है। व्यापारिक संगठनों और बाजार के जानकारों से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी के मौके पर पूरे देश में लगभग 40,000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत में धार्मिक त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों का हमारी अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा योगदान होता है।
बाजारों में रौनक और पारंपरिक सामानों की बंपर मांग
इस बार के उत्सव की तैयारियों में माखन और मिश्री से लेकर विशेष प्रकार के भोग, भगवान के लिए सुंदर पोशाकें, शानदार मोर मुकुट, और मनमोहक झूले शामिल हैं। लोग अपने घरों को सजाने के लिए नाना प्रकार की सामग्रियों की खरीदारी कर रहे हैं। मंदिर परिसरों से लेकर स्थानीय बाजारों तक हर जगह ग्राहकों की भारी भीड़ नजर आ रही है। मूर्तिकारों, कपड़ा व्यापारियों, फूल विक्रेताओं और मिष्ठान विक्रेताओं के यहाँ महीनों पहले से बुकिंग और तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं और झांकियों के आयोजन के लिए भी विशेष सजावट के सामानों की मांग में भारी उछाल दर्ज किया गया है। कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए यह समय सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाला साबित हो रहा है, क्योंकि पारंपरिक हस्तशिल्प और कलाकृतियों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
त्योहारी अर्थव्यवस्था और जनमानस का उत्साह
इस विशाल खर्च के आंकड़े से यह भी साबित होता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव किस प्रकार से देश के छोटे-मोटे कारोबारियों और दुकानदारों की आजीविका को बढ़ावा देते हैं। कोविड के बाद के इन वर्षों में उत्सवों के प्रति लोगों का उत्साह और अधिक बढ़ गया है। लोग अपने इष्टदेव के स्वागत में किसी भी प्रकार की कंजूसी नहीं करना चाहते हैं। चाहे महानगर हों या छोटे कस्बे, हर जगह उपभोक्ता बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। बाल गोपाल के श्रृंगार और उनके आराम के लिए सुंदर झूलों की खरीद पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, यह जन्माष्टमी न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी एक नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है, जिससे देश के बाजारों में भारी चहल-पहल बनी हुई है और हर वर्ग के व्यापारी इस उत्सव से लाभान्वित हो रहे हैं।