नर्वदेश्वर मंदिर से रात में हुई शुरुआत
गोरखपुर के धर्मशाला बाजार स्थित नर्वदेश्वर मंदिर से रात के समय भरत जी की इस विशेष यात्रा की शुरुआत की गई थी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीराम के प्रति भरत जी के अद्वितीय प्रेम, उनके बड़े त्याग और महान समर्पण को प्रदर्शित करना था, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। रात के इस समय निकाली गई इस धार्मिक यात्रा के दौरान पूरे रास्ते में एक अत्यंत ही पावन और भक्तिमय माहौल बना रहा, जिससे पूरा इलाका गूंज उठा। इस दौरान मार्ग में मौजूद तमाम श्रद्धालुओं ने जगह-जगह रुककर इस यात्रा का अत्यंत उत्साह के साथ स्वागत किया तथा भगवान के जयकारे लगाए। हर कोई इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा था और माहौल पूरी तरह से भक्ति के रंगों में रंगा हुआ नजर आया। यात्रा अपने तय मार्ग से आगे बढ़ते हुए रात के समय ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ी।
सुमेर सागर और गोलघर से गुजरा मार्ग
नर्वदेश्वर मंदिर से आरंभ होने के पश्चात यह यात्रा अपने निर्धारित और तय मार्ग के अनुसार आगे की ओर रवाना हुई। सबसे पहले यह यात्रा सुमेर सागर क्षेत्र से गुजरी और वहां से आगे बढ़ते हुए विजय चौक तक पहुंची। विजय चौक के बाद इस यात्रा का कारवां गोलघर की तरफ मुड़ा और वहां से होते हुए आगे बढ़ा। शहर के इन प्रमुख और व्यस्त चौराहों तथा मार्गों से गुजरने के दौरान इस यात्रा को देखने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। हर एक गुजरने वाले स्थान पर स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने इसका जोरदार अभिनंदन किया। भगवान श्रीराम और भरत जी के आपसी प्रेम को दर्शाने वाली इस यात्रा के मार्ग में सभी जगह सुरक्षा और अनुशासन का पूरा ध्यान रखा गया। मार्ग के प्रत्येक मोड़ पर लोगों ने फूलों की वर्षा कर और जयकारे लगाकर इस पूरी यात्रा का स्वागत किया, जिससे आयोजकों और उपस्थित जनता में भारी उत्साह देखने को मिला।
धर्मशाला बाजार में हुआ यात्रा का समापन
विभिन्न प्रमुख और निर्धारित इलाकों का लंबा चक्कर लगाने के बाद यह यात्रा अंत में वापस अपने शुरुआती स्थान यानी धर्मशाला बाजार पहुंची। धर्मशाला बाजार पहुंचते ही इस धार्मिक यात्रा का औपचारिक रूप से समापन कर दिया गया। यह पूरी रामलीला मुख्य रूप से मर्यादा, आपसी भाईचारे और पारिवारिक प्रेम जैसे महान जीवन मूल्यों का बहुत ही सुंदर संदेश देती है। धर्मशाला बाजार की इस स्थानीय रामलीला का इतिहास काफी पुराना रहा है और यह सालों से हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में लगातार एक बेहद अहम और महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इस प्रकार के आयोजनों से समाज में आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में काफी मदद मिलती है। आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा आगे भी इसी प्रकार श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाई जाती रहेगी ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहें और इस महान परंपरा का निरंतर विस्तार होता रहे।