इच्छापुर गांव की अनोखी धार्मिक परंपरा
देशभर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समितियों द्वारा मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। बुरहानपुर जिले का इच्छापुर गांव इस मामले में पूरी तरह अलग है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर बसे इस गांव में करीब 450 सालों से सार्वजनिक दुर्गा पंडाल लगाने की प्रथा नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि उनके गांव में साक्षात माता रानी का निवास है, इसलिए अलग से मूर्ति स्थापना की आवश्यकता नहीं पड़ती है। यहां के निवासियों की गहरी आस्था अपने गांव के इच्छा देवी मंदिर में है। भक्त पूरे साल अपनी पीड़ा और मनोकामनाएं लेकर इस दरबार में आते हैं। लोग संतान प्राप्ति, नौकरी, विवाह संबंधी बाधाओं और बीमारी से मुक्ति के लिए माता की शरण में पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता है कि यहां रोते हुए आने वाले भक्त हंसते-हंसते लौटते हैं। इस गांव का पूरा वातावरण नवरात्रि के दौरान मां इच्छा देवी के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति भाव से ओत-प्रोत रहता है।
स्वयंभू प्रतिमा और मंदिर का इतिहास
मंदिर ट्रस्ट और पुजारियों के अनुसार, मां इच्छा देवी की प्रतिमा स्वयंभू है और करीब साढ़े चार सौ वर्ष पुरानी है। कहा जाता है कि देवीदास नामक एक ब्राह्मण ने यहां 50 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने साक्षात दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। तपस्वी ने जन-कल्याण और देशवासियों की खुशहाली के लिए माता से इसी स्थान पर विराजमान होने का आग्रह किया था। तब से माता रानी इसी पर्वत पर भक्तों की इच्छाएं पूरी कर रही हैं। मंदिर के निर्माण का श्रेय ग्वालियर के एक मराठा सूबेदार को जाता है, जिन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। बाद में भुस्कुटे परिवार ने मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनवाईं। आज यह स्थान इच्छा देवी धाम के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध है। भक्त यहां आकर नारियल, चुनरी और पुष्प अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए दर्जनों सीसीटीवी कैमरे, कूलर, पंखे और पेयजल जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
धार्मिक आस्था और व्यापक व्यवस्थाएं
इच्छा देवी मंदिर में दर्शन के लिए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात सहित अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दोनों नवरात्रि उत्सवों के दौरान यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस दरबार में मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। जलगांव की रहने वाली डॉ. प्रांजली पाटिल जैसे कई भक्त मंदिर की चमत्कारिक शक्तियों के गवाह हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट विशेष प्रबंध करते हैं। शाहपुर थाना पुलिस की तैनाती के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मुस्तैद रहती है। परिसर में एएनएम और सीएचओ की ड्यूटी लगाई जाती है और 24 गुना 7 एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध रहती है। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूलों और खिलौनों की दुकानें भी सजती हैं। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और खुशहाली का प्रतीक भी बना हुआ है। भक्त यहां अपने परिवार और देश के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करने आते हैं।