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जितिया व्रत विशेष: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का पूरा समय
सनातन धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व है, जो माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस पावन अवसर पर सही तिथियों, शुभ मुहूर्त और पारण के नियमों की पूरी जानकारी प्राप्त करना बहुत जरूरी होता है ताकि व्रत का पूर्ण फल मिल सके।
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Ankit Yadav
17 सित 2026, 15:37
सनातन संस्कृति में जितिया यानी जिउतिया व्रत का पर्व बेहद कठिन और महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान माताएं अपनी संतानों के सुखी जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस व्रत को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिलता है। खासकर ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक में इसकी तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती हैं। व्रत के नियमों का पालन बहुत ही अनुशासन के साथ किया जाता है, जिसमें स्नान, पूजन और कथा सुनने का विशेष विधान है।
व्रत की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
पारंपरिक पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस बार भी व्रती महिलाओं के मन में तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है, जिसे दूर करने के लिए विद्वान पंडित और ज्योतिषी सटीक तिथियों और शुभ मुहूर्त की घोषणा करते हैं। व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसके अगले दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। इस दौरान सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि पूजन कार्यों को सही समय पर संपन्न किया जा सके। पूजा के शुभ मुहूर्त के दौरान महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की कथा सुनती हैं और अपनी संतान की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं।
पारण का समय और व्रत के नियम
व्रत का समापन यानी पारण अगले दिन नवमी तिथि को किया जाता है। पारण के समय का भी विशेष महत्व होता है क्योंकि इसे नियत समय पर ही खोलना उत्तम माना गया है। पारण से जुड़े नियमों में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया जाता है, जिन्हें ग्रहण करने के बाद ही व्रत का समापन होता है। जानकारों का मानना है कि इस दौरान साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। व्रत के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए बुजुर्गों और आचार्यों द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में इस पावन पर्व को लेकर बाजारों में भी काफी रौनक देखने को मिलेगी। फल, फूल और पूजन सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। व्रत के सफल आयोजन के लिए स्थानीय स्तर पर भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और कथाओं का प्रबंध किया जाता है, जिससे समाज में आपसी सौहार्द और धार्मिक आस्था मजबूत होती है। सभी व्रती महिलाओं को अपने घर-परिवार में सुख-शांति के लिए इस अनुष्ठान को विधि-विधान से पूरा करने की सलाह दी जाती है।