सराय बरई में रामलीला का आयोजन
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के अंतर्गत आने वाले पूरेडलई विकास खंड क्षेत्र के अंतर्गत सराय बरई नाम के गांव में इन दिनों विशेष सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम चल रहा है। इस धार्मिक उत्सव का आयोजन दुर्गा पूजा महोत्सव के पावन अवसर पर किया जा रहा है। इसी सांस्कृतिक कार्यक्रम के सिलसिले में गांव के भीतर रामलीला के मंचन का विशेष प्रबंध किया गया था। इस रामलीला को देखने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी सैकड़ों की संख्या में दर्शक पंडाल में पहुंचे थे। दर्शकों की भारी भीड़ ने इस धार्मिक आयोजन के प्रति अपना उत्साह खुलकर प्रदर्शित किया। कलाकारों के अभिनय को देखने के लिए लोग काफी समय पहले से ही अपनी जगहों पर व्यवस्थित होकर बैठ गए थे। ग्रामीण इलाकों में इस प्रकार के बड़े धार्मिक आयोजनों का होना आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का एक बहुत बड़ा माध्यम माना जाता है।
प्रधान द्वारा मेघनाद का सजीव अभिनय
इस भव्य रामलीला मंचन के दौरान एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला वाकया देखने को मिला जब गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान सुरेश चंद्र गुप्ता ने मंच पर कदम रखा। उन्होंने इस नाटक के दौरान रावण के पुत्र मेघनाद का मुख्य किरदार निभाकर सभी देखने वालों को हैरान कर दिया। उनके द्वारा निभाए गए इस नकारात्मक किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण पात्र के अभिनय की सभी ने सराहना की। मंचन के क्रम में मेघनाद ने अपनी मायावी शक्तियों का प्रयोग करते हुए शक्ति बाण का इस्तेमाल किया जिसके वार से भगवान श्रीराम के अनुज लक्ष्मण अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। लक्ष्मण के इस प्रकार बेहोश हो जाने के बाद भगवान राम के मन में गहरा दुखों का सागर उमड़ पड़ा। इस दृश्य को देखकर पंडाल में मौजूद सभी दर्शक पूरी तरह भावुक हो गए। इसके बाद संकट की इस घड़ी में हनुमान जी तुरंत अपनी विशेष शक्ति के बल पर संजीवनी बूटी लेकर घटनास्थल पर पहुंचे और लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की।
रावण वध और विभीषण का प्रसंग
कथा के अगले पड़ाव में रावण के निरंतर बढ़ते जा रहे अत्याचारों से तंग आकर उसका सगा भाई विभीषण दुखी मन से भगवान श्रीराम की शरण में पहुंच गया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने उसे सहर्ष अपनी शरण में स्वीकार कर लिया और आगे चलकर उसे लंका का नया राजा घोषित कर दिया। इस घटनाक्रम के ठीक बाद भगवान राम और लंकापति रावण के बीच अति भीषण युद्ध का मंचन शुरू हुआ। दोनों के बीच हुए इस भयंकर संघर्ष में अंततः भगवान राम ने अपने अचूक बाण का संधान करके रावण का अंत कर दिया और इस प्रकार संसार में धर्म की पुनर्स्थापना और जीत को पूरी तरह सुनिश्चित कर दिखाया। जैसे ही मंच पर रावण वध की यह अंतिम लीला संपन्न हुई, वैसे ही पूरा पंडाल भगवान श्री राम के जयकारों की गूंज से पूरी तरह सराबोर हो गया।