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रामलीला प्रसंग: भरत ने अयोध्या लौटकर संभाला राजकाज, श्रद्धालुओं में उमड़ी भावनाएं

चित्रकूट से लौटने के बाद भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर राज्य का संचालन करने का निर्णय लिया। इस धार्मिक मंचन के दौरान धर्मस्थल बाजार में भारी संख्या में नागरिक और समिति के सदस्य उपस्थित रहे। इस दृश्य ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को पूरी तरह भावविभोर कर दिया।

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Ankit Yadav
19 अक्ट 2026, 13:52
रामलीला प्रसंग: भरत ने अयोध्या लौटकर संभाला राजकाज, श्रद्धालुओं में उमड़ी भावनाएं

चित्रकूट यात्रा और पादुका लेकर वापसी का घटनाक्रम

रात के समय भरत जी चित्रकूट की पावन भूमि पर पहुंचे और वहां उन्होंने श्रीराम से वापस अयोध्या चलने का विनम्र अनुरोध किया। हालांकि, श्रीराम ने अपने वनवास के संकल्प को पूरा करने पर अडिग रहते हुए वापस लौटने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इसके पश्चात, भरत जी ने निराश होने के बजाय श्रीराम की चरण पादुकाओं को अपने साथ लिया और अयोध्या की ओर अपनी वापसी की यात्रा शुरू की। इस पूरी घटना के दौरान राम के प्रति भरत का अगाध प्रेम, उनका महान त्याग और अटूट समर्पण पूरी स्पष्टता के साथ दिखाई दिया। मंच पर चल रहे इस संवाद और अभिनय ने वहां मौजूद हर एक व्यक्ति को अत्यधिक प्रभावित किया। रामलीला के इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे और सभी ने इस प्रसंग को बेहद तन्मयता के साथ देखा। इस विशेष अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की भव्यता ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।

सिंहासन पर पादुका रखकर शासन चलाने का निर्णय

अयोध्या वापस लौटने के बाद भरत जी ने किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत अधिकार न जताते हुए एक अनूठा निर्णय लिया। उन्होंने श्रीराम की उन चरण पादुकाओं को राज सिंहासन पर स्थापित कर दिया और उसी को आधार मानकर राज्य का संचालन करने का फैसला किया। इस प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक कदम ने भाई के प्रति आदर और कर्तव्यपरायणता की एक अद्भुत मिसाल पेश की जिसे देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। मंच पर इस प्रसंग के जीवंत चित्रण ने श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस आयोजन की सफलता में कई प्रमुख नागरिकों और समिति के सदस्यों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सभी गतिविधियों का संचालन सुचारू रूप से किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने राम और भरत के इस पवित्र प्रसंग के माध्यम से समाज को त्याग और प्रेम का संदेश देने वाले इस मंचन की जमकर सराहना की।

कार्यक्रम में मौजूद गणमान्य नागरिकों की सूची और उपस्थिति

इस भव्य धार्मिक मंचन के दौरान क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित और गणमान्य नागरिक तथा आयोजन समिति के सदस्य विशेष रूप से मौजूद रहे। समिति की ओर से सत्यनारायण प्रसाद गुप्ता, शशांक शेखर त्रिपाठी, सच्चिदानन्द पाण्डेय और रवि प्रकाश मिश्र ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इनके साथ ही डॉ। धर्मेन्द्र कुमार सिंह, राजन चौरसिया, दुर्गेश गुप्ता और विजय तिलक कोरी ने भी आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लिया। समिति के अन्य सदस्यों में सचिन गुप्ता, विनोद दूबे, राकेश गुप्ता और कृष्णकांत गुप्ता ने भी अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इस सूची में सत्येन्द्र सिंह, अमन पटवा और विरु गुप्ता जैसे नाम भी शामिल रहे जिन्होंने अपनी उपस्थिति से आयोजन को सफल बनाया। इन सभी गणमान्य व्यक्तियों और समिति के सदस्यों की देखरेख में पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। स्थानीय नागरिकों ने भी इस मंचन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस सांस्कृतिक तथा धार्मिक आयोजन को यादगार बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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