राज्यपाल करेंगे शुभारंभ और मुख्यमंत्री समापन समारोह की संभालेंगे कमान
आगामी 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आयोजन समिति के प्रमुख और स्थानीय विधायक ने इस बात की पुष्टि की है कि समारोह की शुरुआत प्रदेश के राज्यपाल के कर-कमलों द्वारा की जाएगी। उद्घाटन समारोह के बाद पूरे सप्ताहभर तक विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी। इस बड़े उत्सव के समापन समारोह की कमान राज्य के मुख्यमंत्री के हाथों में होगी जो खुद पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। समिति की तरफ से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयोजन को लेकर सभी आवश्यक प्रबंध समय से पूरे कर लिए गए हैं ताकि आने वाले देशी और विदेशी मेहमानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उत्सव के दौरान सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हो सके। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए देश-विदेश से कई प्रतिष्ठित मेहमानों और कलाकारों को आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया है जो अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
विदेशों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां और ग्लोबल डांस बनेगा खास आकर्षण
इस वर्ष आयोजित होने वाले उत्सव में दुनिया भर से बड़ी संख्या में कलाकारों की भागीदारी देखने को मिलेगी। प्राप्त विवरण के अनुसार थाईलैंड, मिस्र, उज्बेकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान और अमेरिका सहित कुल 12 देशों के कलाकारों ने इस सांस्कृतिक महाकुंभ में आने की अपनी पुष्टि दे दी है। इसके अलावा कुल 24 देशों की भागीदारी इस आयोजन को एक वैश्विक मंच प्रदान करती है। इस बार के कार्यक्रमों की सूची में ग्लोबल डांस कार्यक्रम को सबसे प्रमुख आकर्षण के रूप में शामिल किया गया है, जिसके माध्यम से विदेशी कलाकारों की कला के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक लोकनृत्यों की अद्भुत छटा भी दर्शकों को देखने को मिलेगी। इस सांस्कृतिक संगम को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी भरपूर उपयोग किया जाएगा जिसके तहत आसमान में होने वाले विशेष ड्रोन शो और रंगबिरंगे लेजर शो उत्सव की रौनक में चार चांद लगा देंगे। इन सभी आधुनिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का अनूठा मेल दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने वाला अनुभव प्रदान करेगा, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।
17वीं शताब्दी की परंपरा और स्थानीय देवी-देवताओं की अनूठी सहभागिता
यह ऐतिहासिक उत्सव किसी एक सदी की देन नहीं है बल्कि इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं जो 17वीं शताब्दी से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करती आ रही हैं। इस पुरानी परंपरा के तहत स्थानीय देवी-देवताओं की विशेष भागीदारी इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है, जिन्हें पूरी श्रद्धा के साथ आमंत्रित किया जाता है। इस बार कुल 346 देवी-देवताओं को इस उत्सव में शामिल होने के लिए विशेष रूप से न्योता भेजा गया है, जो इस आयोजन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और अधिक बढ़ा देता है। केवल पारंपरिक अनुष्ठानों तक ही यह उत्सव सीमित नहीं रहता है बल्कि इसमें विभिन्न प्रकार की स्थानीय खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, जिनमें युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष नशामुक्ति अभियान भी इस मंच के माध्यम से चलाया जाएगा, ताकि युवाओं को सही दिशा दिखाई जा सके। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा अपनी प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी जिनसे लोगों को कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिल सकेगी। आयोजन समिति के प्रमुख ने देश के कोने-कोने से सभी नागरिकों को इस भव्य उत्सव में सम्मिलित होने के लिए खुला आमंत्रण दिया है।