षष्ठी पर कालीबाड़ी मंदिर में भक्तों का उत्साह
नवरात्र के पावन पर्व की षष्ठी तिथि को कालीबाड़ी मंदिर में विशेष चहल-पहल देखी गई। देवी दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप को समर्पित इस दिन मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा नजर आया। दूर-दराज से आए लोग मां के दर्शन करने के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए। मंदिर का वातावरण भक्तिमय गीतों और मंत्रों की गूंज से ओत-प्रोत हो गया। शारदीय नवरात्र के चलते यहां इन दिनों हर तरफ आस्था की लहर दौड़ रही है। भक्त अपनी बारी का इंतजार करते हुए मां कात्यायनी के भव्य रूप को निहारने के लिए बेहद उत्साहित थे। सुबह से ही मंदिर के द्वार खुलते ही भक्तों ने प्रवेश करना शुरू कर दिया था। परिसर के भीतर का पूरा इलाका फूलों और रोशनी की सजावट से दमक रहा था। हर कोई देवी मां के इस विशिष्ट स्वरूप का दर्शन पाकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा था। वहां मौजूद भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि लोगों की श्रद्धा का स्तर कितना अधिक है।
श्रद्धालुओं की प्रार्थना और आरती की गूंज
मंदिर परिसर के भीतर आरती के दौरान एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला जहां पूरे क्षेत्र में जयकारे गूंज उठे। बड़ी संख्या में जुटे भक्त अपने परिवार की सुख और समृद्धि की कामना के साथ देवी के चरणों में झुके। मां कात्यायनी की दिव्य छवि के सामने मत्था टेकते हुए लोग अपने जीवन की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते दिखे। वहां का नजारा ऐसा था मानो पूरा मंदिर परिसर श्रद्धा के महासागर में तब्दील हो गया हो। भक्त गण हाथ जोड़कर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे थे। आरती का समय आते ही वहां का माहौल अत्यंत अलौकिक और सुखद हो गया। कई लोग अपने साथ परिवार के छोटे बच्चों को भी लेकर पहुंचे थे। हर तरफ से सुनाई दे रहे जयकारों ने वातावरण में सकारात्मकता का संचार कर दिया। व्यवस्था संभालने के लिए लगे हुए लोग और मंदिर प्रशासन के सदस्य भी पूरे दिन मुस्तैदी से काम करते रहे ताकि दर्शन का क्रम निरंतर चलता रहे। वहां आने वाले हर भक्त के चेहरे पर एक अलग ही संतोष और सुकून का भाव स्पष्ट झलक रहा था।
मां कात्यायनी की महिमा और धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार मां कात्यायनी को साहस, शक्ति और विजय की अधिष्ठात्री माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करते हैं ताकि उन्हें जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिल सके और हर प्रकार की बाधाएं दूर हो जाएं। शारदीय नवरात्र के छठे दिन उनकी आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो भी साधक मां के इस स्वरूप का सच्चे मन से ध्यान करता है, उसके जीवन में सुख-शांति का वास होता है। कालीबाड़ी मंदिर में इन दिनों जारी दर्शन और पूजन का सिलसिला इसी परंपरा का अभिन्न अंग है। लोग न केवल सुख की कामना के लिए बल्कि आंतरिक शक्ति को जागृत करने के लिए भी यहां पहुंचते हैं। मां कात्यायनी की उपासना से मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। नवरात्र के हर दिन का अपना एक विशिष्ट महत्व है, लेकिन षष्ठी के दिन कात्यायनी देवी की उपासना को विशेष रूप से फलदायी माना गया है। भक्त पूरे उत्साह के साथ अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए देवी की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाकर अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन कर रहे हैं।