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धर्म

तीज का पर्व: हरतालिका तीज की सही तारीख, ब्रह्म मुहूर्त और पूजन विधि

सनातन संस्कृति में हरतालिका तीज का विशेष महत्व माना गया है। इस पावन अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए कठोर व्रत रखती हैं और विधि-विधान से भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।

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Ankit Yadav
11 सित 2026, 13:41
तीज का पर्व: हरतालिका तीज की सही तारीख, ब्रह्म मुहूर्त और पूजन विधि
सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में शुमार हरतालिका तीज का त्योहार इस वर्ष भी बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत देश के तमाम हिस्सों में इस पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजार सज चुके हैं और व्रती महिलाएं पूजन सामग्री की खरीदारी में जुटी हुई हैं। इस व्रत में महिलाएं अन्न और जल का त्याग करती हैं और निर्जला रहकर भगवान भोलेनाथ और माता गौरी की आराधना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए रखा था।

हरतालिका तीज की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

पारंपरिक पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही व्रती महिलाओं की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ब्रह्म मुहूर्त का समय पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। इस विशेष बेला में स्नान कर साफ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है। लखनऊ और उसके आसपास के ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में इस तिथि को लेकर विशेष तैयारियां की जाती हैं, जहां महिलाएं सामूहिक रूप से मिलकर पूजा की कथा सुनती हैं और एक-दूसरे को सुहाग की शुभकामनाएं देती हैं। दिन चढ़ने के साथ ही प्रदोष काल और शुभ चौघड़िया में माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष पूजा संपन्न की जाती है। इस दौरान बालू या शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग और माता गौरी की प्रतिमा बनाकर उनकी षोडशोपचार पूजा करने का विधान है। पूजा में बेलपत्र, शमी के पत्ते, धतूरा, भांग, सुहाग की सामग्री और फल-फूल अर्पित किए जाते हैं। लखनऊ के कई मंदिरों में भी इस पावन अवसर पर विशेष अनुष्ठान और कथा के आयोजन किए जाते हैं, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। व्रत के अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पारण करने का नियम है। हालांकि कई जगहों पर महिलाएं पूरी रात जागरण करती हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान शिव का ध्यान करती हैं। इस दौरान घर-परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहता है और पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। पंडितों और ज्योतिषविदों के अनुसार, विधि-विधान से किए गए इस व्रत से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
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