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गणेशोत्सव की धूम: इस साल गणेश चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मोदक भोग के नियम
इस साल गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। पर्व की सटीक तिथि, भगवान गणेश की स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त, विधि-विधान और प्रसाद से जुड़े नियमों की पूरी जानकारी यहाँ दी गई है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 15:32
सनातन संस्कृति में गणेश चतुर्थी का त्योहार अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमा को घरों और पंडालों में स्थापित किया जाता है। भक्तगण दस दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान गणपति की आराधना में लीन रहते हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी की तिथि को लेकर लोगों के मन में विभिन्न सवाल हैं, जिनका समाधान पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत राज्य के तमाम जिलों में इस पर्व की तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं, जहाँ बाजारों में गणेश मूर्तियों और पूजन सामग्री की दुकानें सजने लगी हैं।
शुभ मुहूर्त और स्थापना के नियम
गणेश स्थापना के लिए सही समय और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि उचित मुहूर्त में बप्पा की स्थापना की जाए, तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस साल गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और चौघड़िया का समय क्या रहेगा, इसकी जानकारी ज्योतिषी दे रहे हैं। लखनऊ के प्रमुख मंदिरों और पूजा स्थलों पर भी विशेष अनुष्ठानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि श्रद्धालु विधिवत रूप से अनुष्ठान संपन्न कर सकें। मूर्तिकार और कारीगर भी अपनी कला को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं ताकि समय पर भक्तों को मनपसंद प्रतिमाएं मिल सकें।
पूजा की विधि में प्रातकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना, वेदी का निर्माण करना और फिर षोडशोपचार विधि से भगवान गणेश का आह्वान करना शामिल है। बप्पा को सिंदूर, दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक अर्पित करने का विधान है। मोदक भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग माना जाता है, इसलिए भोग में मोदक या लड्डू जरूर शामिल किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न पारंपरिक बाजारों में इस दौरान विशेष मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है और हलवाई विशेष रूप से मोदक तैयार करते हैं।
त्योहार के इन दिनों में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। पंडालों में सुबह-शाम महाआरती होती है जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि उत्सव के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रमुख मार्गों पर विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है ताकि आम जनता को आवागमन में परेशानी का सामना न करना पड़े।
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ ही इस दस दिवसीय उत्सव का समापन होता है। विसर्जन यात्रा के दौरान भी भारी उल्लास देखने को मिलता है। इस प्रकार, गणेश चतुर्थी का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देता है। सभी भक्त अभी से अपने घरों को सजाने और इस भव्य उत्सव का स्वागत करने की तैयारियों में तल्लीन हैं।