जिऑन स्कूल में हुआ गरबा आयोजन
शनिवार के दिन सेक्टर-5 क्षेत्र के भीतर स्थित जिऑन इंटरनेशनल स्कूल परिसर में एक भव्य गरबा और डांडिया नाइट्स उत्सव का आयोजन किया गया था। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ऊषा प्रियदर्शी ने शिरकत की और उपस्थित लोगों को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि नवरात्र केवल पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ करने का समय भर नहीं होता है। यह पावन पर्व मनुष्य के भीतर आत्मबल, साहस और आत्मसंयम को जागृत करने का कार्य करता है। इसके माध्यम से लोग अपने जीवन में आने वाली तमाम बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। समारोह के दौरान गुरुग्राम भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष तथा स्थानीय निगम पार्षद सोनिया यादव और स्कूल की प्रिंसिपल स्नेहलता समेत समाज की तमाम महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहीं। इस दौरान पूरे परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला और सभी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और पारंपरिक स्वागत के साथ की गई थी।
नारी शक्ति और सुरक्षा पर जोर
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए आयोग की प्रमुख ने इस बात पर विशेष बल दिया कि समाज की प्रत्येक नारी के भीतर शक्ति का असली स्वरूप हमेशा से ही विद्यमान रहता है। महिलाओं को अपनी इस आंतरिक शक्ति को भली-भांति पहचानना चाहिए और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ अपनी मुखर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि देश और समाज की महान वीरांगनाओं के जीवन इतिहास से गहरी प्रेरणा लेनी चाहिए। सभी को अटूट साहस और पूरा आत्मविश्वास रखते हुए हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। हरियाणा राज्य महिला आयोग महिलाओं तथा बेटियों की पूर्ण सुरक्षा, उनके सम्मान और उनके सशक्तीकरण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। आत्मविश्वास, साहस और आपसी एकजुटता के बल पर ही महिलाएं अपनी सुरक्षा के प्रति अधिक जागरूक और सक्षम बन सकती हैं। उन्होंने सभी माताओं से यह भी विशेष अपील की कि वे अपनी बेटियों को आत्मरक्षा का विशेष प्रशिक्षण जरूर दिलवाएं ताकि वे हर परिस्थिति का खुद मुकाबला कर सकें। इस दौरान वक्ता ने महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर विचार रखे और समाज को एक सकारात्मक दिशा में आगे ले जाने का संदेश दिया जिसे वहां मौजूद सभी लोगों ने बहुत ध्यान से सुना।
संस्कार और संस्कृति का महत्व
कार्यक्रम के अंतिम चरण में बच्चों की परवरिश और पारिवारिक मूल्यों पर बहुत महत्वपूर्ण बातें साझा की गईं। वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि केवल बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करना ही काफी नहीं होता है। इसके साथ-साथ उन्हें अपनी प्राचीन भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों के साथ जोड़ना भी उतना ही अधिक जरूरी है। माताओं का यह दायित्व बनता है कि वे अपने बच्चों को पारिवारिक रिश्तों का वास्तविक महत्व समझाएं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए अच्छे संस्कार दें। आज के समय में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखना बहुत आवश्यक हो गया है ताकि वे समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें। इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के भीतर आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का काम करते हैं। स्कूल प्रांगण में आयोजित इस सुंदर कार्यक्रम ने सभी को एकजुट होने का अवसर प्रदान किया और समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित किया। अंत में सभी ने इस सफल आयोजन के लिए आयोजकों और विद्यालय प्रबंधन की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया और भविष्य में ऐसे ही कार्यक्रमों के आयोजन की उम्मीद जताई।