दशहरे पर अनुष्ठान और आयोजनों का सिलसिला
देश भर के नागरिक आज 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पवित्र त्योहार बहुत उत्साह और उल्लास के साथ मना रहे हैं। इस पावन अवसर पर सनातन परंपराओं के अनुसार शमी पूजा और शस्त्र पूजा का विधान पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भी संपन्न होगा और नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि के व्रतों का पारण किया जाएगा। शाम ढलते ही बुराई के प्रतीक माने जाने वाले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों का दहन किया जाएगा। इन आयोजनों का गवाह बनने के लिए लोग अपने बच्चों को लेकर मेलों में जाएंगे और इस भव्य उत्सव का आनंद उठाएंगे। समाज के हर वर्ग के लोग इस पारंपरिक पर्व को अपने परिवारों के साथ मिलकर हर्षोल्लास से मना रहे हैं। इस खास दिन पर चारों तरफ उत्सव का माहौल बना हुआ है और लोग एक दूसरे को बधाई संदेश भेजकर अपने दिन को यादगार बना रहे हैं। पर्व के इस पावन मौके पर विभिन्न धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ का क्रम दिनभर चलता रहेगा जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।
पौराणिक कथा और विजय का संदेश
धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार आज के ही ऐतिहासिक दिन पर भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का संहार किया था। इसके साथ ही आदिशक्ति मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध करके असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की महान विजय स्थापित की थी। इसी महान पौराणिक उपलक्ष्य में हर साल विजयादशमी और दशहरे का पर्व पूरी भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग सुंदर संदेशों और शुभकामनाओं के जरिए अपने प्रियजनों के जीवन में सकारात्मकता लाने की कामना कर रहे हैं। संदेशों में इस बात की प्रार्थना की जाती है कि लोगों के जीवन से भय का नाश हो और संकटों की हार हो ताकि विजय का प्रकाश हर तरफ फैल सके। दया, धर्म और सत्य का हमेशा मान बना रहे और समाज में कीर्ति तथा यश का गान गूंजे। रावण रूपी हर दुख जीवन से दूर हो जाए और हर व्यक्ति का सपना सत्य साबित हो। राम की मर्यादा और सीता का सम्मान पाने की प्रेरणा के साथ हनुमान जैसी भक्ति और लक्ष्मण जैसा साथ जीवन में बना रहे। लोगों के घरों में खुशियों की बहार सदा के लिए बरसे और जीवन से हर प्रकार का अंधकार मिट जाए।
मंगलकामनाएं और जीवन में संस्कारों का महत्व
अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का यह पर्व हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और सफलता लेकर आता है। इस पावन अवसर पर सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की जाती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का आशीर्वाद सभी लोगों और उनके पूरे परिवारों पर सदैव बना रहे ऐसी मंगलकामना की जाती है। जब-जब मानव मन में अहंकार रूपी रावण अपना सिर उठाने का प्रयास करे, तब-तब भगवान राम के आदर्शों का दीप उसे सही राह दिखाए। जीवन में हमेशा सत्य और प्रेम का वास होना चाहिए ताकि हर दिन उल्लास और खुशियों से भरा रहे। प्राचीन पावन श्लोकों और मंत्रों के माध्यम से महिषासुर मर्दिनी की स्तुति की जा रही है ताकि सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल सके। भक्तों का विश्वास है कि देवी की कृपा से मनुष्य को धन, धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में कभी कोई संदेह नहीं रहता। इन तमाम धार्मिक आयोजनों और शुभकामनाओं का उद्देश्य समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना और बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।