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डिग्री का अपमान: बीटेक धारकों को बनाया रसोइया और चौकीदार, जयपुर में भारी प्रदर्शन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में बेरोजगार युवाओं और उच्च शिक्षित डिग्री धारकों का गुस्सा फूट पड़ा है, जहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं को चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सेवा देने के लिए मजबूर किए जाने पर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

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Ankit Yadav
09 सित 2026, 11:37
डिग्री का अपमान: बीटेक धारकों को बनाया रसोइया और चौकीदार, जयपुर में भारी प्रदर्शन
राजस्थान के राजनीतिक और शैक्षणिक गलियारों में इस समय एक अजीबोगरीब और चिंताजनक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा जिन्होंने अपनी बीटेक की डिग्री हासिल करने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत की और लाखों रुपये खर्च किए, उन्हें सरकारी व्यवस्था के तहत खाना पकाने यानी रसोइया और पहरेदारी यानी चौकीदार जैसे चतुर्थ श्रेणी के कामों में लगा दिया गया है। इस प्रकार की स्थिति सामने आने के बाद राज्य के युवाओं में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने राजधानी जयपुर की सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्हें इस स्तर के कार्य सौंपना उनकी योग्यता और डिग्रियों का सीधा अपमान है।

रोजगार संकट और प्रशासनिक विफलता

देशभर में बढ़ती बेरोजगारी और योग्य युवाओं के लिए उपयुक्त अवसरों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है, लेकिन राजस्थान की यह हालिया घटना इस बात का प्रमाण है कि रोजगार नियोजन प्रणाली में किस स्तर की खामियां मौजूद हैं। बीटेक जैसे पेशेवर और तकनीकी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद भी जब युवाओं को चतुर्थ श्रेणी की नौकरियां मिलती हैं, तो यह न केवल उस व्यक्ति की व्यक्तिगत आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाता है बल्कि देश की संपूर्ण शिक्षा और रोजगार नीति पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। जयपुर में हुआ यह विरोध प्रदर्शन महज एक नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का सामूहिक गुस्सा है जो इंजीनियरिंग स्नातकों को उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार मुहैया कराने में असफल साबित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस प्रकार की नियुक्तियों की तुरंत समीक्षा की जाए और योग्यता के आधार पर उचित पदों पर नियुक्ति दी जाए।

भविष्य की नीतियां और युवाओं का संघर्ष

इस घटना के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। युवाओं का कहना है कि उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने के सपने देखे थे, लेकिन मौजूदा हालातों ने उन्हें दिहाड़ी और चतुर्थ श्रेणी के कामों के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। सरकार और संबंधित विभागों पर अब यह दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले का संज्ञान लें और पारदर्शिता तथा योग्यता के मानदंडों को ध्यान में रखते हुए रोजगार के नए और बेहतर अवसर सृजित करें। जयपुर के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर देश में बढ़ती बेरोजगारी और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की आवश्यकता को सबसे आगे ला दिया है, जिस पर तुरंत गंभीर विचार किए जाने की जरूरत है।
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