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नीति आयोग रिपोर्ट: भारत में 7.65 करोड़ 'NEET यूथ' पढ़ाई और नौकरी से दूर घरेलू कार्यों में व्यस्त
नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में देश के युवाओं की रोजगार और शिक्षा स्थिति को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 7.65 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार की नौकरी या रोजगार से जुड़े हैं, बल्कि वे पूरी तरह से घरेलू कामकाज में उलझे हुए हैं।
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Ankit Yadav
24 अग 2026, 15:55
देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा तय करने वाले नीति आयोग ने हाल ही में भारतीय श्रम बाजार और युवा आबादी की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि देश की कुल आबादी का 45.1 प्रतिशत हिस्सा लेबर फोर्स या श्रम शक्ति का हिस्सा है। हालांकि, इस व्यापक परिदृश्य के बीच एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो शिक्षा, प्रशिक्षण या रोजगार के औपचारिक दायरे से बाहर है। इस श्रेणी को 'नीट' यानी 'नॉट इन एजुकेशन, एंप्लॉयमेंट ऑर ट्रेनिंग' (NEET) के रूप में परिभाषित किया जाता है, और भारत में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़कर 7.65 करोड़ तक पहुंच गई है।
घरेलू कार्यों में उलझे युवा और अवसर की कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, इन 7.65 करोड़ युवाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये किसी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित नहीं हैं और न ही इनके पास कोई आजीविका का साधन है। इसके बजाय, इनका अधिकांश समय घर के विभिन्न कार्यों को संभालने में बीतता है। अर्थशास्त्रियों और समाज वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति देश के जनसांख्यिकीय लाभांश (डिमोग्राफिक डिविडेंड) के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है। जब देश की एक बड़ी युवा आबादी बिना किसी औपचारिक कौशल या रोजगार के घरेलू दायित्वों तक सीमित रह जाती है, तो यह मानव संसाधन के बड़े पैमाने पर अवमूल्यन को दर्शाता है।
नीति आयोग के इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि देश के श्रम बाजार में औपचारिक नौकरियों का सृजन और युवाओं की कौशल क्षमता के बीच एक गहरा अंतर बना हुआ है। कई क्षेत्रों में युवाओं के पास रोजगार पाने के लिए आवश्यक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण का अभाव है, जिसके कारण वे श्रम शक्ति का सक्रिय हिस्सा नहीं बन पाते हैं। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक सामाजिक ढांचे के कारण भी कई युवाओं, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, को घरेलू कार्यों में अधिक संलग्न पाया जाता है, जिससे उनकी आर्थिकी में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं हो पाती है।
भविष्य की नीतियां और रोजगार सृजन की चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत को अपनी विशाल युवा आबादी का वास्तविक लाभ उठाना है, तो नीति निर्माताओं को रोजगार सृजन, कौशल विकास और शिक्षा प्रणाली में बड़े सुधार करने होंगे। केवल औपचारिक डिग्री देने के बजाय ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना आवश्यक है जो युवाओं को सीधे तौर पर श्रम बाजार से जोड़ सकें। इसके अलावा, महिलाओं और युवाओं के लिए सुरक्षित, सुलभ और बेहतर रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी विशेष जोर देने की आवश्यकता है ताकि 'नीट' श्रेणी में आने वाले इस विशाल वर्ग को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में लाया जा सके।
आने वाले समय में इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें अपनी नई रोजगार नीतियों की रूपरेखा तैयार कर सकती हैं। श्रम और कौशल विकास मंत्रालयों के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी के साथ-साथ दिशा-निर्देश का काम कर रही है, ताकि देश के युवाओं को केवल घरेलू सीमाओं में समेटने के बजाय उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा में शामिल किया जा सके।