कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल पुलिस का अलर्ट - तिब्बत की तरफ़ बना डैम टूटा, लोगों से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      धोखाधड़ी, उत्पीड़न और फिर मर्डर; दिल्ली की मॉडल हत्या मामले में 'जहरीले रिश्ते' का खुलासा      आज लोकसभा चुनाव हुए तो BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कैसा हाल, C-वोटर का आया सर्वे      ज़ोहरान ममदानी को लेकर प्रवासी भारतीयों में बहस, आरएसएस ने जारी किया ये बयान      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?      दो सरकारी टीचरों ने RSS मार्च में हिस्सा लिया, दोनों सस्पेंड हो गए | The Lallantop     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
शिक्षा

शिक्षा की बदहाली: विकसित भारत के सपने के सामने सबसे बड़ी चुनौती जर्जर ढांचा

देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने के मार्ग में कमजोर और खस्ताहाल होती शैक्षणिक व्यवस्था सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभर रही है, जिस पर गंभीर विचार और सुधार की आवश्यकता है।

A
Ankit Yadav
27 अग 2026, 12:52
शिक्षा की बदहाली: विकसित भारत के सपने के सामने सबसे बड़ी चुनौती जर्जर ढांचा
एक तरफ जहां पूरा देश आगामी दशकों में एक विकसित राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर शिक्षा प्रणाली की जर्जर स्थिति इस महान लक्ष्य के आड़े आ रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी और ग्रामीण विद्यालयों का खस्ताहाल ढांचा इस बात का गवाह है कि अभी भी बुनियादी स्तर पर बहुत कुछ किया जाना बाकी है। गुणवत्तापूर्ण और सर्वसुलभ ज्ञान के बिना किसी भी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है, और यही कारण है कि शिक्षा क्षेत्र की यह विसंगति अब नीति निर्माताओं के लिए चिंता का मुख्य विषय बन चुकी है।

बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव

देशभर के कई इलाकों में शिक्षण संस्थानों की इमारतें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। छतों से पानी टपकना, चारदीवारी का न होना, पीने के साफ पानी की कमी और शौचालयों का अभाव जैसी बुनियादी समस्याएं आज भी आम हैं। इन परिस्थितियों में विद्यार्थियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करना बेमानी साबित होता है। जब तक स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए उचित बेंच-डेस्क और अध्ययन के अनुकूल वातावरण नहीं मिलेगा, तब तक साक्षरता अभियानों और सुधार के तमाम दावे कागजी साबित होते रहेंगे। बजट आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन के बीच का यह बड़ा अंतर सुधार की गति को धीमा कर देता है।

शिक्षक और संसाधन की दोहरी मार

भौतिक संसाधनों की कमी के अलावा योग्य शिक्षकों की भारी कमी और प्रशासनिक उदासीनता भी इस समस्या को और अधिक जटिल बना देती है। कई विद्यालयों में एकल शिक्षक के भरोसे पूरी पाठशाला चल रही है, जिससे बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान और सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीकी शिक्षा और डिजिटल संसाधनों से वंचित ये संस्थान आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में पिछड़ते जा रहे हैं। जब तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक ढांचे की इस खाई को पाटा नहीं जाएगा, तब तक समावेशी विकास का सपना अधूरा ही रहेगा।

सुधार के लिए ठोस रणनीतिक कदम जरूरी

इस विकट परिस्थिति से उबरने के लिए केवल योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धरातल पर कड़े और पारदर्शी प्रशासनिक कदम उठाने होंगे। सरकार और समाज दोनों को मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम करना होगा। धन के सदुपयोग की निगरानी और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करके ही इस व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है। आने वाले समय में यदि देश को वैश्विक स्तर पर अपनी एक मजबूत और आत्मनिर्भर पहचान कायम रखनी है, तो अपनी शिक्षण प्रणाली की इन कमजोरियों को दूर करना ही होगा।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज