प्रायोगिक परीक्षाओं का शेड्यूल और संचालन
स्नातकोत्तर यानी पीजी कक्षाओं की प्रायोगिक परीक्षाओं की शुरुआत आगामी 23 अक्टूबर से निर्धारित की गई है। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, शांतिपूर्ण और नकल विहीन बनाने के वास्ते विश्वविद्यालय प्रबंधन ने विशेष प्रबंध किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर विशेष प्रेक्षकों का एक दल बनाया गया है। यह दल परीक्षा की अवधि के दौरान अलग-अलग स्नातकोत्तर विभागों तथा स्नातकोत्तर कॉलेजों का व्यक्तिगत रूप से जाकर जायजा लेगा। परीक्षा से जुड़े सभी संस्थानों को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वे तय किए गए सभी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करें। विश्वविद्यालय की तरफ से सभी संबंधित विभागों को यह स्पष्ट रूप से बता दिया गया है कि वे 27 अक्टूबर तक प्रायोगिक परीक्षा का काम पूरा कर लें। इसके बाद परीक्षा से जुड़ी सभी उत्तरपुस्तिकाएं और अंक सूचियां विश्वविद्यालय को अनिवार्य रूप से सौंपनी होंगी ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
एडिशनल विषय और परीक्षा के अंक
सीबीसीएस पाठ्यक्रम प्रणाली के अंतर्गत स्नातकोत्तर कक्षाओं के हर एक सेमेस्टर में एक अतिरिक्त विषय की पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराई जा रही है। इस अतिरिक्त विषय की कुल परीक्षा 100 अंकों की होती है जिसमें से 30 अंकों की आंतरिक परीक्षा पहले ही आयोजित की जा चुकी है। इसके अलावा हाल ही में समाप्त हुई सैद्धांतिक परीक्षाओं के अंतिम दिन इसी अतिरिक्त विषय की मुख्य परीक्षा भी सफलतापूर्वक ले ली गई है। परीक्षा नियंत्रक के मुताबिक जब प्रायोगिक परीक्षाएं पूरी तरह संपन्न हो जाएंगी तब दोनों सत्रों के परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। विश्वविद्यालय द्वारा मंगाई गई उत्तरपुस्तिकाओं और अंकों की सूचियों के आधार पर ही दोनों सत्रों का अंतिम परीक्षा परिणाम तैयार किया जाएगा। प्रशासन ने यह तय किया है कि 15 नवंबर तक हर हाल में परिणाम तैयार करके जारी कर दिया जाए। प्रायोगिक परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्र-छात्राएं अपनी अगली सेमेस्टर की कक्षाओं में आसानी से भाग ले सकेंगे और उनकी पढ़ाई आगे बढ़ पाएगी।
सत्र नियमित करने की दिशा में नए कदम
जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दोनों स्नातकोत्तर सत्र अपने तय शैक्षणिक कैलेंडर से लगभग छह से आठ महीने पीछे चल रहे हैं। इस देरी को पाटने के लिए और शैक्षणिक सत्र को पूरी तरह पटरी पर लाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार गंभीर प्रयास कर रहा है। परीक्षा नियंत्रक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दिसंबर महीने तक स्नातकोत्तर सत्र 2024 से 2026 के चौथे सेमेस्टर और सत्र 2025 से 2027 के तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित करने का पक्का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए परीक्षा विभाग के स्तर पर अभी से ही सारी जरूरी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं। विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य समय पर परीक्षाएं कराकर परिणामों की घोषणा करना है ताकि छात्र-छात्राओं का भविष्य सुरक्षित रहे और विलंब की समस्या पूरी तरह से खत्म हो सके। इन सभी प्रशासनिक कदमों से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।