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प्रक्रिया अटकी: राजस्थान में बोर्ड की अनुमति का इंतजार, 1240 सीटों पर स्टेट कोटा काउंसलिंग प्रभावित
देशभर में मेडिकल और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए ऑल इंडिया काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन राजस्थान में प्रशासनिक और बोर्ड स्तर से हरी झंडी न मिलने के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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Ankit Yadav
26 अग 2026, 17:03
देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक सत्र के दाखिले के लिए केंद्रीय स्तर पर काउंसलिंग की प्रक्रिया का औपचारिक आगाज हो चुका है। छात्र अपने पसंदीदा संस्थानों और पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए आवश्यक चरणों को पूरा करने में जुटे हुए हैं। हालांकि, इस बीच पश्चिमी भारत के प्रमुख राज्य राजस्थान से एक चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है, जहां हजारों छात्र और उनके अभिभावक असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं। अखिल भारतीय स्तर पर गतिविधियां तेज होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर अभी तक संबंधित बोर्ड की आधिकारिक अनुमति या दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। इस प्रशासनिक विलंब की वजह से उन तमाम उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ गई हैं जो स्थानीय स्तर पर प्रवेश के लिए अपनी बारी का टकटकी लगाकर इंतजार कर रहे हैं।
1240 सीटों पर फंसा पेंच
राजस्थान के मेडिकल और शैक्षणिक गलियारों से मिल रही ताजा जानकारियों के अनुसार, कुल 1240 सीटों के लिए निर्धारित स्टेट कोटे की पूरी प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटकी हुई है। जब तक राज्य का संबंधित बोर्ड अपनी औपचारिक स्वीकृति और दिशा-निर्देश जारी नहीं करता, तब तक इन महत्वपूर्ण सीटों के आवंटन के लिए काउंसलिंग का अगला दौर शुरू नहीं किया जा सकता। राज्य कोटे के तहत आने वाली इन 1240 सीटों पर प्रवेश के इच्छुक युवाओं का भविष्य इस बात पर टिका है कि संबंधित अधिकारी कितनी जल्दी कागजी कार्रवाई और तकनीकी बाधाओं को दूर करते हैं। ऑल इंडिया कोटे की तर्ज पर ही राज्य के भीतर भी समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी, लेकिन बोर्ड स्तर पर हो रही इस अनपेक्षित देरी ने पूरी समय-सारणी को ही प्रभावित कर दिया है, जिससे छात्रों में निराशा का माहौल बनता जा रहा है।
शैक्षणिक सत्र के कैलेंडर के लिहाज से इस प्रकार की रुकावटें छात्रों के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होती हैं। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही इस गतिरोध को समाप्त नहीं किया गया, तो संपूर्ण शैक्षणिक सत्र की गतिविधियां विलंबित हो जाएंगी, जिसका सीधा असर कक्षाओं के संचालन और पाठ्यक्रम पूरा होने पर पड़ेगा। छात्र संगठन और अभिभावक संघ लगातार संबंधित प्राधिकारियों से यह गुहार लगा रहे हैं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और जितनी जल्दी हो सके बोर्ड की अनुमति की औपचारिकता पूरी करवाएं। राज्य कोटे की इन 1240 सीटों पर एडमिशन की राह देख रहे युवा और उनके परिवार अब प्रशासनिक तंत्र की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई की योजना बिना किसी मानसिक तनाव के तय कर सकें।