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फिल्म शूटिंग का गढ़: चेन्नई कॉन्क्लेव में तमिल फिल्म जगत ने उत्तराखंड की नीति में दिखाई गहरी रुचि

उत्तराखंड में फिल्मों की शूटिंग का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में चेन्नई में आयोजित एक विशेष कॉन्क्लेव के दौरान तमिल फिल्म उद्योग के दिग्गजों ने धामी सरकार की फिल्म नीति के प्रति अपनी उत्सुकता और रुचि व्यक्त की है।

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Ankit Yadav
12 सित 2026, 12:01
फिल्म शूटिंग का गढ़: चेन्नई कॉन्क्लेव में तमिल फिल्म जगत ने उत्तराखंड की नीति में दिखाई गहरी रुचि
पिछले कुछ वर्षों में देवभूमि उत्तराखंड सिने प्रेमियों और निर्माताओं के बीच शूटिंग के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में उभर कर सामने आया है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, शांत वादियां और पहाड़ियों के मनमोहक दृश्य हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसी कड़ी में हाल ही में चेन्नई में एक विशेष फिल्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, जिसमें दक्षिण भारत के प्रमुख फिल्म निर्माताओं और तकनीशियनों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर उत्तराखंड सरकार की ओर से लाई गई नई और प्रगतिशील फिल्म नीति के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया गया, जिसे लेकर वहां के फिल्म जगत में काफी सकारात्मक चर्चा देखने को मिली।

तमिल फिल्म इंडस्ट्री की खास दिलचस्पी

इस कॉन्क्लेव के दौरान तमिल सिनेमा के कई बड़े निर्माताओं और निर्देशकों ने पहाड़ी राज्य में अपनी आगामी परियोजनाओं की शूटिंग करने की इच्छा जताई। उनका मानना है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी व्यवस्थाओं से किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करना बेहद आसान हो जाता है। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य प्रशासन जिस तरह से सिनेमा जगत के लोगों को प्रोत्साहित कर रहा है, उससे देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ दक्षिण भारत के फिल्म मेकर्स भी यहां आने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। यह कदम न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

धामी सरकार की फिल्म नीति के मुख्य आकर्षण

उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गई फिल्म नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य को वैश्विक स्तर पर फिल्म शूटिंग का प्रमुख केंद्र बनाना है। इस नीति के तहत निर्माताओं को कई प्रकार की वित्तीय छूट, प्रशासनिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाती है ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। इसके अलावा, स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को भी इसमें प्राथमिकता देने के प्रावधान किए गए हैं, जिससे क्षेत्रीय कला को भी एक नया मंच मिल रहा है। चेन्नई कॉन्क्लेव में इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया, जिससे दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माताओं का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

भविष्य की संभावनाएं और उम्मीदें

आने वाले समय में इस तरह के आयोजनों से राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्रों को एक नया आयाम मिलने की पूरी उम्मीद है। जिस तरह से तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने इस पहल में अपनी रुचि दिखाई है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की वादियों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स की शूटिंग देखने को मिल सकती है। राज्य प्रशासन भी इस दिशा में पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है और बाहरी निर्माताओं को हरसंभव मदद मुहैया कराने का आश्वासन दे रहा है। यह सहभागिता निश्चित रूप से भारतीय सिनेमा के फलक पर उत्तराखंड को एक विशिष्ट पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।
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