अस्पताल में भर्ती और ऑपरेशन से प्रसव
पतेरी की रहने वाली 25 वर्षीय शालनी सिंह परिहार को 14 अक्टूबर की सुबह 5 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक उसी दिन सुबह 11 बजे ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे का जन्म हुआ था। सुशील नामक डॉक्टर नवजात का इलाज कर रहे थे। जन्म के बाद से लेकर अगले दिन यानी गुरुवार की सुबह 11 बजे तक बच्चे की हालत पूरी तरह से सामान्य बनी हुई थी और किसी भी प्रकार की कोई जटिलता सामने नहीं आई थी। अस्पताल प्रशासन की देखरेख में प्रसव प्रक्रिया पूरी हुई थी और परिवार के लोग बच्चे के जन्म से खुश थे। लेकिन इसके बाद अचानक स्थिति बिगड़ने लगी जिससे परिजनों की चिंता बहुत बढ़ गई। इस पूरी घटना के बाद से अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया और परिवार के लोगों ने अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की। सभी लोग बच्चे की अचानक हुई इस तरह की स्थिति से काफी हैरान और परेशान दिखाई दे रहे थे।
सांस लेने में दिक्कत और परिजनों का हंगामा
परिजनों का सीधा आरोप है कि गुरुवार की शाम को ठीक 4 बजे नवजात को अचानक सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी। जब बच्चे की तबीयत बिगड़ी तो डॉक्टर उस समय रीवा में मौजूद थे। ऐसी आपात स्थिति में डॉक्टर के उपलब्ध न होने पर परिजन घबरा गए और तुरंत बच्चे को लेकर डॉ। राकेश जैन के पास पहुंचे। डॉ। राकेश जैन के क्लीनिक या अस्पताल पहुंचने पर उन्होंने नवजात की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर सुनते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिवार के लोगों का कहना है कि समय पर सही इलाज और डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण ही यह दर्दनाक स्थिति पैदा हुई है। इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल में काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा और परिजनों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई। अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई और डॉक्टर तथा प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
मौत का कारण स्पष्ट नहीं और प्रबंधन की प्रतिक्रिया
इस पूरी घटना के बाद से नवजात की मौत का सही कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। डॉक्टरों और मेडिकल जांच के बाद ही मौत के असली कारणों का आधिकारिक रूप से पता चल सकेगा। दूसरी ओर इस मामले में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है। अस्पताल की ओर से अभी तक इस पूरी घटना पर कोई स्पष्ट बयान या सफाई जारी नहीं की गई है। परिजन लगातार लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। इस दुखद घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। आम जनता और पीड़ित परिवार यह जानना चाहते हैं कि आखिर सामान्य स्थिति में रह रहे बच्चे की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर डॉक्टर क्यों नहीं मिल सके। आगे की स्थिति अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।