खुले आसमान के नीचे प्रदर्शन
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में नर्सिंग छात्राओं का आंदोलन अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है क्योंकि उनकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी है। धरना स्थल से टेंट और अन्य जरूरी सामग्री चोरी होने के बाद से ये छात्राएं खुले आसमान के नीचे बैठकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। बिना किसी बुनियादी सुविधा के खुले में बैठने के कारण इन प्रदर्शनकारी छात्राओं की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। पिछले 11 दिनों से लगातार अपनी मांगों को लेकर मुखर इन छात्राओं को समय पर भोजन तक नहीं मिल पा रहा है। भोजन और मूलभूत सुविधाओं के इस भारी अभाव के कारण आंदोलन कर रही छात्राओं का स्वास्थ्य अब चिंताजनक रूप से खराब होने लगा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति की ओर बिल्कुल भी ध्यान देने को तैयार नहीं हैं। छात्राओं का आरोप है कि इतने दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी रहने के बावजूद उनकी जायज मांगों को लेकर कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय स्तर पर प्रशासन की इस गहरी उदासीनता और लगातार बरती जा रही लापरवाही के कारण सभी प्रदर्शनकारी छात्राओं में गहरा रोष व्याप्त है। इन तमाम विकट परिस्थितियों के बावजूद छात्राएं अपनी जिद पर अड़ी हुई हैं और ठंड तथा धूप की परवाह किए बिना धरना स्थल पर डटी हुई हैं।
अस्पताल में भर्ती और अन्य मामले
धरना प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण कई छात्राओं को गंभीर शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रा पायल वास्कले की तबीयत ज्यादा खराब होने के चलते उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। इसके अलावा पार्वती कन्नोजे की तबीयत भी बहुत खराब हो गई है और वह पिछले तीन दिनों से अपने घर पर ही आराम करने को मजबूर हैं। एक अन्य छात्रा राखी अवासे के संबंध में यह जानकारी सामने आई है कि उन्होंने गोली खाने के बाद फिर से धरना स्थल पर आकर बैठना शुरू कर दिया है। सुमेर सिंह ने इन सभी गंभीर घटनाक्रमों के बीच सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और तीखी चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से यह मांग की है कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे और इन सभी छात्राओं की समस्याओं का संतोषजनक समाधान निकाले। उनका यह भी कहना है कि इतने लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कदम न उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वास्थ्य संबंधी इतनी सारी परेशानियां सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से कोई सुधि नहीं ली जा रही है जिससे स्थिति और भी अधिक बिगड़ती जा रही है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
लगातार 11 दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक स्तर पर कोई भी ठोस सुनवाई न होने से स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। सुमेर सिंह और अन्य लोगों ने प्रशासन की इस पूरी कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा करते हुए छात्राओं की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रदर्शनकारी छात्राओं का अब यह स्पष्ट रूप से कहना है कि प्रशासन बिना किसी और देरी के उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से सुनवाई करे। छात्राओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनके इन मुद्दों के निराकरण के लिए उचित और कड़े कदम नहीं उठाए गए तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक गंभीर रूप ले लेगा। यदि इसके बाद किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी या गंभीर घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर जिला प्रशासन की ही होगी। बुनियादी सुविधाओं के अभाव और समय पर भोजन न मिलने जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझती ये छात्राएं अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित नजर आ रही हैं। जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की इस तरह की अनदेखी ने पूरे मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इन तमाम चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए धरना दे रही इन बीमार छात्राओं की सुध लेता है और उनकी मांगों का समाधान करता है।