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स्वास्थ्य

चिकित्सा में क्रांति: एआई और रोबोटिक्स से बदल रहा इलाज, मध्य प्रदेश में सरकारी व्यवस्था पिछड़ी और कॉलेजों में संकट

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे आधुनिक बदलावों पर चर्चा तेज हो गई है। वैश्विक स्तर पर रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मरीजों का इलाज बेहद उन्नत तरीके से किया जा रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य ढांचा और अकादमिक व्यवस्था इस दौड़ में काफी पीछे नजर आ रही है।

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Ankit Yadav
08 सित 2026, 16:50
चिकित्सा में क्रांति: एआई और रोबोटिक्स से बदल रहा इलाज, मध्य प्रदेश में सरकारी व्यवस्था पिछड़ी और कॉलेजों में संकट
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके पर जहां एक तरफ पूरी दुनिया चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नए आविष्कारों का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ राज्यों की जमीनी हकीकत गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और अत्याधुनिक रोबोटिक्स तकनीक ने रोगियों के स्वास्थ्य लाभ की पूरी प्रक्रिया को ही बदलकर रख दिया है। इन उन्नत तकनीकों की मदद से न केवल जटिल से जटिल बीमारियों का सटीक निदान संभव हो पा रहा है, बल्कि पुनर्वास यानी रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया भी अत्यधिक प्रभावी और त्वरित बन चुकी है। विकसित देशों और देश के कुछ चुनिंदा निजी अस्पतालों में इन तकनीकों का प्रयोग आम होने लगा है।

सरकारी व्यवस्थाओं और तकनीकी अपनाव की सुस्त रफ्तार

इसके विपरीत, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हाल अभी भी काफी निराशाजनक बना हुआ है। सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में मरीजों को आज भी पारंपरिक और पुरानी विधियों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। अत्याधुनिक रोबोटिक उपकरणों और एआई आधारित सॉफ्टवेयर का अभाव सरकारी चिकित्सा तंत्र की पोल खोलता है। न तो मरीजों को इस आधुनिक क्रांति का लाभ मिल पा रहा है और न ही प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता दिखाई दे रहा है। बुनियादी उपकरणों की कमी के कारण जरूरतमंद गरीब तबके के लोगों को अत्याधुनिक इलाज के लिए महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जो उनकी जेब पर भारी पड़ता है।

फिजियोथेरेपी शिक्षा के समक्ष खड़े हुए गंभीर संकट

केवल इलाज का क्षेत्र ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई की स्थिति भी बेहद दयनीय हो चुकी है। राज्य के विभिन्न फिजियोथेरेपी कॉलेजों में संसाधनों और फैकल्टी का भारी संकट बना हुआ है। छात्रों को आधुनिक तकनीकों के बारे में पढ़ाने के लिए न तो पर्याप्त प्रयोगशालाएं हैं और न ही उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था उपलब्ध है। जब कॉलेजों में ही आधुनिक तकनीक और रिसर्च का अभाव होगा, तो वहां से निकलने वाले युवा चिकित्सक व्यावहारिक रूप से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कैसे टिक पाएंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते राज्य सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो चिकित्सा शिक्षा का यह संकट आने वाले समय में और अधिक गंभीर रूप ले लेगा।

भविष्य की जरूरतें और सुधार की दिशा में कदम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश को चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करना है, तो सरकार को तत्काल प्रभाव से बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव करने होंगे। मेडिकल और फिजियोथेरेपी कॉलेजों के पाठ्यक्रम को आधुनिक एआई और रोबोटिक्स के युग के अनुकूल बनाना होगा। इसके साथ ही, सरकारी अस्पतालों में आधुनिक मशीनों की खरीद और डॉक्टरों तथा थेरेपिस्ट्स के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को भी वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो सकें।
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