अस्पतालों में हुआ व्यापक अध्ययन
देशभर के इक्कीस राज्यों के कुल तरेपन अस्पतालों को इस शोध प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इस बड़े अध्ययन के जरिए हृदय रोगियों के वित्तीय और क्लीनिकल आंकड़ों का बहुत बारीकी से विश्लेषण किया गया। यह शोध इस साल मार्च के महीने में ग्लोबल हार्ट नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों का सालाना औसत खर्च एक लाख छह हजार रुपये तक पहुंच रहा है। इतनी बड़ी रकम चुकाने में सामान्य परिवारों के पसीने छूट रहे हैं और उन्हें अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ रही है। इस गंभीर स्थिति के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अध्ययन के ये आंकड़े देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों की क्रय शक्ति पर गहरा असर डालते हैं। हर मरीज को अपनी बीमारी से लड़ने के साथ साथ इस भारी भरकम खर्च का भी इंतजाम करना पड़ रहा है।
कैटास्ट्रोफिक हेल्थ स्पेंडिंग का बोझ
अध्ययन के नतीजों से यह बात भी साफ हो गई है कि लगभग सैंतीस प्रतिशत से ज्यादा परिवार अत्यधिक स्वास्थ्य खर्च का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति में इलाज का कुल खर्च इन परिवारों की भुगतान क्षमता से पूरी तरह बाहर हो जाता है। मजबूरी में सत्तर प्रतिशत से ज्यादा लोगों को इस वित्तीय दबाव से निपटने के लिए या तो कर्ज लेना पड़ता है या अपनी कीमती संपत्ति बेचनी पड़ जाती है। इसके अलावा बीमारी के इस गंभीर दौर के कारण बत्तीस प्रतिशत से अधिक मरीजों और छत्तीस प्रतिशत से ज्यादा परिवारों की मासिक आय में सीधी और भारी गिरावट दर्ज की गई है। आय कम होने और इलाज का खर्च बढ़ने से इन परिवारों का पूरा बजट बिगड़ गया है। जिन लोगों के पास पहले से स्वास्थ्य बीमा मौजूद था, केवल वे ही इस भयानक आर्थिक संकट से सुरक्षित बच पाए। बीमा न होने वाले परिवारों को अपनी जमीन या गहने तक बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
सरकार से बीमा का विशेष सुझाव
इस विकट परिस्थिति से उबरने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों ने सरकार को एक बहुत ही महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव दिया है। अध्ययन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकार को दिल के मरीजों की इस समस्या पर तुरंत गंभीर ध्यान देना चाहिए। इसके तहत हृदय रोगियों के लिए अलग से विशेष स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने की सिफारिश की गई है। इस तरह की विशेष व्यवस्था से आम जनता को अपना महंगा उपचार करवाने में बहुत आसानी मिल जाएगी। हिमाचल प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में भी दिल के रोगियों के सामने आज यही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि समय रहते इन मरीजों के लिए वित्तीय सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो स्थिति और भी अधिक भयानक हो सकती है। आम नागरिकों को इस जानलेवा बीमारी के इलाज के दौरान होने वाली कंगाली से बचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।