विद्यार्थियों द्वारा नशे के विरुद्ध संकल्प समारोह का आयोजन समाज में फैल रही नशे की घातक प्रवृत्ति के खिलाफ युवाओं ने एक बहुत ही प्रेरणादायक कदम उठाते हुए दृढ़ संकल्प लिया है। प्रभात खबर में प्रकाशित ताजा समाचार के अनुसार शिक्षण संस्थानों और छात्र समुदाय ने मिलकर यह संदेश दिया है कि वे अपने जीवन में कभी भी नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करेंगे और अपने आस-पास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे। इस विशेष अवसर पर विद्यार्थियों ने हाथ उठाकर और सामूहिक रूप से यह प्रतिज्ञा ली कि वे देश के विकास में अपनी पूरी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे। मादक पदार्थों का सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बर्बाद करता है बल्कि पूरे परिवार और समाज को आर्थिक व मानसिक संकट में डाल देता है। इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिन्होंने बच्चों के इस जज्बे की सराहना की और खुद भी इस मुहिम का हिस्सा बनने का वादा किया।
स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण में नशे की रोकथाम का महत्व किसी भी देश की असली ताकत उसकी युवा शक्ति होती है और यदि युवा ही नशे के जाल में फंस जाएं तो राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। आधुनिक समय में छात्र जीवन में तनाव, संगति का असर और अन्य कारणों से नशे की लत तेजी से पैर पसार रही है जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है। इस प्रकार के जनजागरण अभियान और शपथ ग्रहण समारोह केवल औपचारिकता नहीं होते बल्कि यह बच्चों के कोमल मन पर एक गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ते हैं। जब शिक्षण संस्थानों में इस तरह की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं तो छात्र नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों के प्रति अधिक संवेदनशील बनते हैं। झारखंड और देश के अन्य हिस्सों में इस तरह के अभियानों की प्रासंगिकता बहुत अधिक बढ़ जाती है क्योंकि युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाना समाज के हर वर्ग की नैतिक जिम्मेदारी है। स्कूलों और कॉलेजों में इस तरह के आयोजनों से बच्चों के भीतर अनुशासन की भावना पैदा होती है और वे असामाजिक तत्वों तथा बुरी आदतों से दूर रहने का प्रयास करते हैं।
इस जन-अभियान का दूरगामी प्रभाव और आगामी कदम विद्यार्थियों द्वारा ली गई इस शपथ का असर आने वाले समय में समाज के दूसरे वर्गों पर भी सकारात्मक रूप से पड़ने की पूरी उम्मीद है। जब युवा खुद आगे आकर किसी सामाजिक बुराई के खिलाफ झंडा उठाते हैं तो उसका संदेश बहुत दूर तक जाता है और बड़े भी सोचने पर मजबूर होते हैं। इस प्रकार की पहल को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बनाने की आवश्यकता होती है ताकि बच्चों के मन में इसके प्रति हमेशा जागरूकता बनी रहे। स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को मिलकर समय-समय पर ऐसी कार्यशालाएं, खेलकूद प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए जिससे विद्यार्थियों का ध्यान रचनात्मक कार्यों में लगा रहे। आने वाले दिनों में इस तरह के अभियानों को गांवों और कस्बों के स्तर पर भी ले जाने की योजना पर काम किया जा सकता है ताकि हर आयु वर्ग के लोग इससे जुड़ सकें। नशा मुक्ति की यह पहल निश्चित रूप से एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित राष्ट्र के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगी।