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स्वास्थ्य

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कैंसर दवाओं पर 10 गुना तक मुनाफाखोरी नरसंहार जैसी, एमआरपी कैपिंग पर मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने देश के अस्पतालों और दवा कंपनियों द्वारा जीवनरक्षक कैंसर दवाओं पर बेतहाशा मुनाफा कमाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। अदालत ने इसे नरसंहार जैसा करार देते हुए केंद्र सरकार को दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य पर सीमा तय करने के निर्देश दिए हैं।

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Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:48
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कैंसर दवाओं पर 10 गुना तक मुनाफाखोरी नरसंहार जैसी, एमआरपी कैपिंग पर मांगा जवाब

अदालत में कैंसर दवाओं के दामों पर गंभीर बहस

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों में दवाओं के मनमाने दामों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। याचिका में दिखाया गया था कि जिस कैंसर इंजेक्शन की लागत अस्पताल को कुछ सौ रुपये पड़ती है, उसे मरीजों को हजारों रुपये में बेचा जाता है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि असाध्य बीमारियों से जूझ रहे परिवारों की मजबूरी का इस तरह आर्थिक दोहन करना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

रिटेलर मूल्य से अधिकतम 16 प्रतिशत मार्जिन का प्रस्ताव

खंडपीठ ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण से पूछा कि जीवनरक्षक दवाओं पर अधिकतम लाभ सीमा सोलह प्रतिशत क्यों नहीं तय की जा सकती। अदालत ने कहा कि जब तक सरकार स्पष्ट नीति नहीं बनाती, तब तक आम नागरिकों की जेब पर यह डाका जारी रहेगा। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भारत में लाखों परिवार केवल चिकित्सा खर्चों के चलते गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं, जिसमें दवाओं की भूमिका सबसे प्रमुख है।

केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

न्यायालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय और रसायन व उर्वरक मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस दिशा में नीतिगत कदम उठाने में विफल रहती है तो न्यायालय को स्वयं दिशानिर्देश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इस फैसले से देशभर के लाखों कैंसर मरीजों और उनके परिजनों में राहत की उम्मीद जगी है।

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