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बड़ी कार्रवाई: उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे 179 मदरसे बंद, हरिद्वार में बरती गई सबसे ज्यादा सख्ती

उत्तराखंड राज्य प्रशासन ने शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए बिना वैध मान्यता के संचालित हो रहे कुल 179 मदरसों को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान हरिद्वार जिले में सबसे अधिक कड़ाई देखने को मिली है, जहां अनधिकृत संस्थानों पर शिकंजा कसा गया है।

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Ankit Yadav
11 सित 2026, 13:13
बड़ी कार्रवाई: उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे 179 मदरसे बंद, हरिद्वार में बरती गई सबसे ज्यादा सख्ती
उत्तराखंड के भीतर चल रहे शिक्षण संस्थानों की नियमित जांच और विनियामक अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रशासनिक अमले द्वारा यह बड़ी कार्रवाई अंजाम दी गई है। राज्य भर में लंबे समय से इस बात की शिकायतें मिल रही थीं कि कई धार्मिक शिक्षण संस्थान बिना किसी आधिकारिक पंजीकरण या बोर्ड की अनुमति के धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं। इन अनधिकृत परिसरों की स्थिति का जायजा लेने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से औचक निरीक्षण अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप नियमों को ताक पर रखकर चल रहे 179 मदरसों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए गए।

हरिद्वार में सबसे सख्त रुख

प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे अभियान के दौरान सबसे अधिक सख्ती हरिद्वार जिले में देखने को मिली है। हरिद्वार क्षेत्र में कई ऐसे मदरसे चिन्हित किए गए जो न केवल बिना मान्यता के संचालित हो रहे थे, बल्कि वहां बुनियादी शैक्षणिक मानकों और बच्चों की सुरक्षा के तय मानदंडों की भी भारी अनदेखी की जा रही थी। जिला प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर इन परिसरों का संचालन रोक दिया और संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक वे शिक्षा बोर्ड से विधिवत मान्यता प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक संस्थान दोबारा नहीं खोले जाएंगे। इस कड़े रुख से अन्य जिलों के अवैध संस्थानों में भी हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के भविष्य और उनकी बुनियादी शिक्षा के अधिकार के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य के सभी जिलों में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर स्कूल और मदरसा तय सरकारी मानकों के दायरे में ही काम करे। बिना मान्यता वाले संस्थानों के खिलाफ इस प्रकार की जांच आगे भी लगातार जारी रहने की पूरी संभावना है ताकि शिक्षा क्षेत्र में पूरी तरह से पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जा सके। दूसरी ओर, इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां शिक्षाविद् और जागरूक नागरिक प्रशासन के इस कदम को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार के लिए आवश्यक मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित संस्थानों के प्रबंधकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। कई प्रबंधकों ने मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाने और अपने दस्तावेजों को पूरा करने के लिए प्रशासन से गुहार लगाने की बात कही है, ताकि छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो।
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