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कानून ब्रेकिंग

सख्त रुख: झारखंड के थानों में सीसीटीवी नहीं लगाने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को भेजा कारण बताओ नोटिस

झारखंड के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने के मामले में उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है और डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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Ankit Yadav
02 सित 2026, 15:18
सख्त रुख: झारखंड के थानों में सीसीटीवी नहीं लगाने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को भेजा कारण बताओ नोटिस
झारखंड राज्य के थानों में सुरक्षा व्यवस्था और मानवाधिकारों के संरक्षण को लेकर अदालत का गुस्सा फूट पड़ा है। राज्य के पुलिस परिसरों और थानों के भीतर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में न होने पर उच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस दिशा में पहले दिए गए निर्देशों की अवहेलना या ढिलाई पाए जाने के बाद अदालत ने सीधा कदम उठाते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी को कारण बताओ नोटिस थमाया है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत इस प्रकार के नोटिस का जवाब देना और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना अब पुलिस मुख्यालय के लिए बेहद आवश्यक हो गया है।

न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी

सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के पुराने आदेशों के बावजूद देश भर के थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और उनकी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के स्पष्ट निर्देश रहे हैं। मकसद साफ है कि हिरासत में होने वाली हिंसा, पूछताछ के दौरान बरती जाने वाली अनियमितताओं और मानवाधिकार के उल्लंघनों पर लगाम लगाई जा सके। झारखंड के मामले में जब अदालत ने समीक्षा की, तो पाया गया कि कई थानों में या तो कैमरे लगाए ही नहीं गए हैं या फिर जो उपकरण लगाए गए हैं वे खराब पड़े हैं अथवा काम नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति को अदालत ने बहुत ही गंभीरता से लिया है और इसे न्यायिक आदेशों की सीधी अवहेलना माना है।

जवाब तलब और आगे की कार्रवाई

कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद अब पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। डीजीपी कार्यालय को यह बताना होगा कि आखिर क्यों तय सीमा के भीतर सभी पुलिस स्टेशनों में कैमरों को पूरी तरह से क्रियाशील नहीं बनाया जा सका। इसके साथ ही, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को यह भी बताना होगा कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो अदालत की तरफ से और भी कड़ी प्रशासनिक या न्यायिक कार्रवाई देखने को मिल सकती है, जिससे पुलिस विभाग पर दवाब और अधिक बढ़ गया है।

पारदर्शिता और सुरक्षा की जरूरत

कानूनी जानकारों का मानना है कि थानों के भीतर सीसीटीवी कैमरों का होना न केवल आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि पुलिस कर्मियों पर लगने वाले झूठे आरोपों से भी उन्हें बचाता है। पारदर्शिता लाने के इस महत्वपूर्ण अभियान में इस तरह की सुस्ती न्याय प्रणाली के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस मुख्यालय की ओर से अदालत में क्या जवाब दाखिल किया जाता है और राज्य के सभी थानों में कब तक पूरी तरह से आधुनिक सर्विलांस सिस्टम सक्रिय हो पाता है।
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