दुर्गाबाड़ी चौकी पर किशोर के विवाद के बाद उपजा तनाव
घटना की शुरुआत शनिवार रात को हुई जब दुर्गाबाड़ी चौकी क्षेत्र के अंतर्गत दो किशोरों के बीच आपसी मारपीट की एक घटना सामने आई। इस सूचना के मिलने के बाद स्थानीय पुलिस दोनों किशोरों को पकड़कर अपने साथ चौकी ले आई ताकि मामले को सुलझाया जा सके। जब इस बात की जानकारी एक किशोर के मामा को मिली तो वे अपने एक अन्य भतीजे के साथ तुरंत उस पुलिस चौकी पर पहुंच गए। चौकी पर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने भांजे को इस तरह की लड़ाई और विवाद करने को लेकर डांटना शुरू कर दिया। इसी दौरान वहां तैनात चौकी प्रभारी ने उस किशोर को कथित तौर पर अपशब्द कहना आरंभ कर दिया जिस पर विवाद बढ़ गया। किशोर के मामा ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वह लड़का उनकी अपनी बहन का बेटा है और पुलिस अधिकारी द्वारा उसे गाली देना बिल्कुल अनुचित है। इस बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई और चौकी प्रभारी ने गुस्से में आकर उस व्यक्ति को धक्का देकर चौकी के कमरे से बाहर खदेड़ दिया। इस पूरी घटना के दौरान वहां आसपास के तमाम लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई थी और लोग पूरे मामले को उत्सुकता से देख रहे थे। स्थिति को बिगड़ता देख और पुलिस के रवैए से नाराज होकर उस व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।
मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर पुलिस की कार्रवाई
जैसे ही उस व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे से चौकी परिसर के भीतर का वीडियो बनाना शुरू किया, वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अधिक नाराज हो गए। आरोप है कि पुलिस ने इसके बाद सख्त कदम उठाते हुए दोनों किशोरों के साथ-साथ परिजनों के साथ आए उस मामा को भी हिरासत में ले लिया। पुलिस उन सभी को दुर्गाबाड़ी चौकी से उठाकर मुख्य थाने ले गई और रातभर उन्हें थाने के अंदर ही बैठाए रखा गया। पीड़ित व्यक्ति की तरफ से यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि थाने के भीतर पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव किया और दोनों किशोरों की जमकर पिटाई भी की। अगले दिन यानी रविवार की सुबह पुलिस ने दोनों किशोरों को तो उनके संबंधित परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया ताकि वे उन्हें घर ले जा सकें। हालांकि, उनके मामा को पुलिस ने जाने नहीं दिया और रविवार दोपहर के समय उन पर शांतिभंग की आशंका जताते हुए उनका चालान कर दिया। इस बीच, जब मीडिया और उच्च अधिकारियों तक यह बात पहुंची तो चौकी प्रभारी ने अपने ऊपर लगे सभी अपशब्द कहने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका अपना पक्ष यह था कि उन्होंने कोई दुर्व्यवहार नहीं किया है बल्कि प्रक्रिया के तहत ही कानूनी कदम उठाया गया है। दूसरी ओर, इस पूरे प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और पुलिस अधिकारियों के अगले सख्त कदम का इंतजार कर रहा है।
उच्च अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश और कार्रवाई का भरोसा
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए। एसपी सिटी निमिष पाटिल ने मीडिया और जनता के सामने बयान देते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता के साथ गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, सीओ कोतवाली ने भी इस मामले की अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है और वे सभी चश्मदीदों के बयान दर्ज कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर से पुलिस और आम नागरिकों के बीच के संबंधों तथा थानों में होने वाले बर्ताव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पुलिस जनता के साथ इस तरह का व्यवहार करेगी तो आम आदमी अपनी शिकायत लेकर थाने जाने से डरेगा। फिलहाल, इस बात पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि सीओ कोतवाली और एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य निकलकर सामने आते हैं। इस घटना के बाद से दुर्गाबाड़ी चौकी क्षेत्र के स्थानीय निवासियों में भी पुलिस की कार्यशैली को लेकर काफ़ी चर्चा और रोष का माहौल बना हुआ है।