संसद मार्ग थाने के बाहर पुलिस की कार्रवाई
नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर बृहस्पतिवार से चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान शुक्रवार को पुलिस ने कई एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को अपनी हिरासत में ले लिया। पुलिस बलों द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई के तुरंत बाद थाने के बाहरी इलाके का पूरा माहौल काफी गरमा गया। इससे पहले ये सभी प्रदर्शनकारी कथित हमले की घटना पर प्राथमिकी दर्ज न किए जाने के कारण आक्रोशित थे। वे लगातार पुलिस अधिकारियों से अपनी मांग पर सुनवाई करने का आग्रह कर रहे थे। अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण इन लोगों ने रात भर थाने के बाहर ही अपना डेरा डाले रखा। आखिरकार शुक्रवार को जब वे अपनी जिद पर अड़े रहे, तब पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
प्राथमिकी दर्ज न होने पर अड़े थे प्रदर्शनकारी
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के ये सभी कार्यकर्ता एक कथित मारपीट के मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर मुखर थे। उनका स्पष्ट कहना था कि उन्होंने अपनी लिखित शिकायत पुलिस के सामने रखी थी, परंतु किसी भी स्तर पर उनकी आवाज नहीं सुनी गई। सुनवाई न होने की वजह से युवाओं का यह समूह पूरी रात थाने के खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठा रहा। लेकिन न्याय मिलने की बजाय शुक्रवार को पुलिस ने उन पर ही सख्त कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इस पूरी घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस के प्रमुख उदय भानु चिब ने इस पुलिसिया कार्रवाई पर गहरी आपत्ति जताई और अपनी तीखी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे नागरिकों के साथ इस तरह का बर्ताव पूरी तरह से अनुचित और निंदनीय है।
नेतृत्त्व और पुलिस कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल
युवा कांग्रेस के प्रमुख उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन पुलिसकर्मियों ने इन प्रदर्शनकारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया, उनके विरुद्ध भी तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। चिब के अनुसार, जब देश के युवा और छात्र अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचते हैं, तो उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती है। इसके विपरीत, उन्हें दबाने के लिए पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी व्यवस्था किसी न किसी मिलीभगत या दबाव के तहत संचालित हो रही है, जिससे आम छात्रों और युवाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है। इस घटना ने राजधानी के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां छात्र संगठन लगातार अपनी मांगों को लेकर मुखर बने हुए हैं।