उच्च न्यायालय में आज होगी महत्वपूर्ण सुनवाई
खतरनाक मांझे से लगातार हो रही मौतों के मामलों को लेकर आज उच्च न्यायालय में सुनवाई तय की गई है। इस अत्यंत गंभीर विषय पर अदालत में कई अहम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। प्रशासन द्वारा पहले भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। पतंगबाजी के दौरान उपयोग किए जाने वाले इस घातक नायलॉन और कांच लेपित धागे के कारण राहगीरों की जान जोखिम में पड़ जाती है। कई मामलों में मोटरसाइकिल चालकों और दोपहिया वाहन सवारों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस गंभीर अदालत की कार्यवाही के दौरान उन सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा जिनके माध्यम से ऐसे हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। न्यायपालिका की नजर इस बात पर भी होगी कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग सुरक्षा नियमों का पालन करवाने में कितने सफल रहे हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवारों की पीड़ा और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों पर भी अदालत का ध्यान केंद्रित रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
घातक डोर से जुड़ी घटनाओं पर अदालत की नजर
प्रतिबंधित मांझे के इस्तेमाल के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने समाज के हर वर्ग को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के दावे किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद अवैध रूप से इस घातक डोर का कारोबार बाजारों में चुपचाप जारी रहता है। पतंगबाजी के शौकीन लोग सस्ते और ज्यादा धारदार विकल्प के चक्कर में इस खतरनाक मांझे को खरीदते हैं। नतीजतन, सड़कों से गुजरने वाले बेकसूर लोग इस अदृश्य जाल का शिकार बन जाते हैं और गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कई मामलों में तो गले कटने से लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी है जो कि एक बेहद विचलित करने वाली सच्चाई है। आज होने वाली सुनवाई के दौरान अदालत यह जानने का प्रयास कर सकती है कि प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में यह सामान कैसे पहुंच रहा है। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के संबंध में भी कुछ कड़े निर्देश पारित किए जा सकते हैं। इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर आम जनता के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों की निगाहें भी टिकी हुई हैं जो लगातार इस पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
कानूनी प्रावधान और सुरक्षा की आवश्यकता
हमारे देश में पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए कई तरह के कड़े कानून और नियम बनाए गए हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर इच्छाशक्ति के कारण अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाती है। खतरनाक मांझा केवल इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि आसमान में उड़ने वाले बेजुबान पक्षियों के लिए भी काल साबित होता है। हर साल मकर संक्रांति और अन्य त्योहारों के आसपास सैकड़ों पक्षी इस डोर की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से इस मामले में एक मजबूत और स्पष्ट संदेश जाने की पूरी संभावना है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कड़े निर्देश मिलने की उम्मीद है जिससे निगरानी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करना अब वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। जब तक आम नागरिकों में इसके प्रति जागरूकता नहीं आएगी और प्रशासन सख्ती से पेश नहीं आएगा, तब तक मासूमों की जान का यह खतरा टलने वाला नहीं है। आज की सुनवाई के बाद संभव है कि राज्य भर में विशेष जांच अभियानों और छापों का दौर एक बार फिर से तेज हो जाए ताकि इस जानलेवा कारोबार को जड़ से समाप्त किया जा सके।