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मतदान प्रशिक्षण अनुपस्थिति: गोरखपुर में 13 लेखपालों और 20 अमीनों को नोटिस जारी

गोरखपुर जिले में आगामी चुनावों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला सामने आया है। मतगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम से गैरहाजिर रहने वाले राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इस लापरवाही के चलते प्रशासन ने कुल तेरह लेखपालों और बीस अमीनों को आधिकारिक नोटिस जारी किया है।

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Ankit Yadav
15 अक्ट 2026, 11:57
मतदान प्रशिक्षण अनुपस्थिति: गोरखपुर में 13 लेखपालों और 20 अमीनों को नोटिस जारी

प्रशिक्षण शिविर से गायब रहे कर्मचारी

गोरखपुर जिले के भीतर आयोजित किए जाने वाले आधिकारिक चुनाव कार्यों की कड़ी में एक विशेष मतगणना प्रशिक्षण का आयोजन तय किया गया था। इस महत्वपूर्ण शासकीय प्रशिक्षण सत्र के दौरान कई कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में पूरी तरह विफल रहे। जिला प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम स्थल पर समय से उपस्थित न होने वाले कर्मियों की सूची तैयार की गई। इस सूची में राजस्व विभाग के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत मैदानी अमले के लोग शामिल पाए गए। प्रशासनिक स्तर पर जब उपस्थिति पंजी का मिलान किया गया तब इस बड़ी अनुपस्थिति का खुलासा हुआ। संबंधित अधिकारियों ने इस प्रकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये को बेहद गंभीरता से लिया और तुरंत आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए। मतगणना जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय कार्य के प्रशिक्षण से इस तरह नदारद रहना उच्च अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया। इसके बाद ही जिला प्रशासन की ओर से इन सभी अनुपस्थित कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए आधिकारिक रूप से कारण बताओ नोटिस जारी करने की औपचारिक शुरुआत की गई।

तेरह लेखपाल और बीस अमीन चिन्हित

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक इस सूची में कुल तेरह लेखपाल और बीस अमीन शामिल किए गए हैं जिन्हें यह कड़ा नोटिस भेजा गया है। लेखपाल भूमि अभिलेखों के रखरखाव और राजस्व वसूली के कार्यों से जुड़े होते हैं जबकि अमीन भी वित्तीय और राजस्व संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष और त्रुटिहीन ढंग से संपन्न कराने के लिए इन कार्मिकों का प्रशिक्षित होना अनिवार्य शर्त माना जाता है। ऐसे में प्रशिक्षण जैसे चरण से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहना प्रशासनिक अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। जिन कर्मियों को नोटिस मिला है उन्हें अब निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यदि उनके द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। इस पूरी कार्रवाई से जिला मुख्यालय के अन्य कर्मचारियों में भी प्रशासनिक मुस्तैदी और अनुशासन का संदेश स्पष्ट रूप से पहुंच गया है।

चुनाव तैयारी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि

भारत में किसी भी स्तर के लोकतांत्रिक चुनाव संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन को महीनों पहले से व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू करनी पड़ती हैं। मतगणना का चरण चुनाव परिणाम घोषित करने का सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से जटिल हिस्सा माना जाता है जिसमें एक भी गलती बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। चुनाव ड्यूटी में लगाए जाने वाले प्रत्येक कर्मचारी को मतदान केंद्रों की व्यवस्था से लेकर मतों की गिनती के हर एक नियम का बारीकी से पाठ पढ़ाया जाता है। इस तरह के प्रशिक्षण शिविरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि मतगणना के दिन किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। जब मैदानी स्तर के कर्मचारी ऐसे अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों से दूरी बनाते हैं तो चुनाव प्रबंधन की पूरी व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो जाता है। यही कारण है कि गोरखपुर प्रशासन ने इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतते हुए तुरंत नोटिस जारी करने का सख्त मार्ग अपनाया है। आने वाले दिनों में इन सभी नोटिस प्राप्त कर्मियों के जवाब के आधार पर जिला प्रशासन की तरफ से अगला प्रशासनिक निर्णय लिया जाएगा।

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