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न्यायिक नजीर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में रद्द की रासुका हिरासत, यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत की गई एक नागरिक की हिरासत को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने पुलिस के समक्ष इकबालिया बयान को निवारक नजरबंदी का आधार मानने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को 10 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया।

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Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:58
न्यायिक नजीर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में रद्द की रासुका हिरासत, यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

पुलिस के सामने दिए बयान पर रासुका लगाना अवैध

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने संभल हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि पुलिस हिरासत में लिए गए बयान के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक पवित्र अधिकार है और कार्यपालिका बिना ठोस व स्वतंत्र साक्ष्यों के इसे छीन नहीं सकती।

उत्तर प्रदेश सरकार को मुआवजा भुगतान का सख्त आदेश

पीठ ने राज्य सरकार की प्रक्रियागत खामियों और शक्तियों के दुरुपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को अवैध रूप से हिरासत में रखने के एवज में एक महीने के भीतर 10 लाख रुपये का हर्जाना दिया जाए। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि यदि भुगतान समय पर नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

दिवंगत लॉ क्लर्क को समर्पित किया ऐतिहासिक फैसला

अदालत ने एक अत्यंत दुर्लभ और मानवीय पहल करते हुए अपने इस ऐतिहासिक फैसले को अपने उस युवा लॉ क्लर्क ऋत्विक देसवाल को समर्पित किया जिनका कुछ दिन पहले असमय निधन हो गया था। पीठ ने कहा कि युवा शोधकर्ता ने इस मामले के कानूनी पहलुओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले को नागरिक अधिकारों की रक्षा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।

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