जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा बंदोबस्त
दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा घोषित विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के हर जिले में व्यापक अभियान चलाया है। कानून व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर कड़ा शिकंजा कसा है। अब तक शहर भर के विभिन्न इलाकों से करीब 30 से 40 ऐसे लोगों को एहतियाती हिरासत में लिया गया है जिनका पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने पूरी तरह से सतर्कता बरती है। इसके अलावा उन संदिग्धों पर भी बारीक नजर रखी जा रही है जो प्रदर्शन के दौरान भीड़ जुटाने या लोगों को भड़काने की क्षमता रखते हैं। एहतियात के तौर पर ऐसे सभी व्यक्तियों के घरों के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी स्तर पर जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं।
दिल्ली की सीमाओं पर तैनात पुलिस बल
राजधानी को एक अभेद्य किले में तब्दील करते हुए पुलिस ने सीमाओं पर पहरा और भी अधिक कड़ा कर दिया है। दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को भी विशेष रूप से मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। इन पुलिसकर्मियों को बरेली, अलीगढ़ और फिरोजाबाद जैसे विभिन्न जिलों से बुलाकर सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों की मौजूदगी है ताकि शांति बनी रहे। अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के विरुद्ध होने वाले शनिवार के प्रदर्शन के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। सुरक्षा के इतने कड़े इंतजामों का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित उपद्रव या हिंसा को समय रहते नियंत्रित करना है। पुलिस का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदर्शन स्थल तक किसी भी अनधिकृत व्यक्ति का पहुंचना नामुमकिन बनाया जाए।
पुराने वादों के उल्लंघन पर पुलिस की सख्ती
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस कठोर कार्रवाई का मुख्य कारण पूर्व में किए गए शपथपत्रों का कथित उल्लंघन है। पिछले 20 जून को हुए प्रदर्शन के समय अभिजीत दीपके और सौरव दास की ओर से एक हलफनामा सौंपा गया था जिसमें प्रदर्शन के दौरान सभी तय नियमों और शर्तों का पालन करने का लिखित वादा किया गया था। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी जिसके बाद से पुलिस प्रशासन अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। उस हलफनामे में 26 बिंदुओं वाली शर्तें शामिल थीं, जिनका पालन न कर उन्हें तोड़ा गया था। अनुमति न होने के बावजूद 20 जुलाई को कॉकरोचों द्वारा निकाले गए संसद चलो मार्च में भी हिंसा हुई थी। इन सभी पिछली घटनाओं और शर्तों के उल्लंघन को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने इस बार सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए हैं ताकि किसी भी सूरत में पुनः हिंसा की पुनरावृत्ति न हो सके।