शामली में दो युवकों ने उठाए आत्मघाती कदम
शामली जिले के अंतर्गत आने वाले कैराना और थानाभवन क्षेत्रों में आत्महत्या की कोशिश की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। पहली घटना तेरह अक्टूबर की रात ग्यारह बजे के आसपास कैराना इलाके में घटी जहां एक निजी कंपनी के कर्मचारी ने चरम मानसिक दबाव और घरेलू कलह के कारण जीवन समाप्त करने का प्रयास किया। इस युवक ने फोटो और वीडियो साझा करने वाले एक लोकप्रिय मंच इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी और वीडियो पोस्ट किया था। उस वीडियो में उसने अपने अंत की बात कहते हुए सभी से माफी भी मांगी थी। जब पुलिस तक यह सूचना मेटा कंपनी के माध्यम से पहुंची तो स्थानीय महकमा तुरंत हरकत में आ गया। कैराना कोतवाली के अंतर्गत पुलिस बल सात मिनट के भीतर उस स्थान पर पहुंच गया। वहां जाकर उन्होंने देखा कि युवक ने फंदे पर लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश की थी। सुरक्षाकर्मियों ने बिना एक भी पल गंवाए उसे तुरंत नीचे उतार लिया और इस तरह उसकी सांसें थमने से बचा ली गईं। इसके ठीक अगले दिन यानी चौदह अक्टूबर की सुबह थानाभवन क्षेत्र में भी ऐसा ही एक और गंभीर मामला प्रकाश में आया। वहां बीएससी की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने अपनी प्रेमिका के साथ हुए आपसी विवाद के बाद खतरनाक कदम उठाने का मन बना लिया था। छात्र ने भी इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करके अपने जीवन को समाप्त करने की बात सार्वजनिक कर दी थी। डिजिटल माध्यम से मिले इसी चेतावनी संदेश के आधार पर थानाभवन थाने की पुलिस टीम तुरंत मौके पर रवाना हुई। उस दल में उपनिरीक्षक वीरेंद्र और सोनिया शामिल थे जो तय समय के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए। वहां पहुंचने पर पुलिसर्किमयों ने देखा कि वह छात्र अपने गले में गमछा कसकर आत्महत्या का प्रयास करने की पूरी तैयारी में था।
पुलिस ने मिनटों में पहुंचकर बचाई अमूल्य जानें
दोनों ही मामलों में पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और समय पर की गई कार्रवाई ने दो परिवारों को एक बड़ी त्रासदी से सुरक्षित निकाल लिया। इंटरनेट मीडिया की मूल कंपनी मेटा से एक चेतावनी संदेश सबसे पहले पुलिस के बड़े अधिकारियों के पास पहुंचा था। वहां से यह संदेश तुरंत शामली जिले के स्थानीय पुलिस थानों को भेज दिया गया ताकि बिना किसी देरी के राहत कार्य शुरू किया जा सके। कैराना कोतवाली की टीम ने रिकॉर्ड सात मिनट के भीतर अपनी कार्रवाई पूरी कर ली थी और फंदे पर लटके युवक को जीवनदान दे दिया था। इसी प्रकार थानाभवन थाने की पुलिस टीम ने भी दस मिनट के भीतर ही छात्र तक पहुंचकर उसकी जान बचा ली। पुलिसर्किमयों ने जब छात्र को गले में गमछा डाले हुए देखा तो उन्होंने एक सेकंड की भी देरी नहीं की। उन्होंने तुरंत उसके हाथ से उस गमचे को हटाया और उसे सुरक्षित स्थिति में ले आए। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने इन दोनों मामलों की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि दोनों युवकों के परिवार के लोगों को इस घटना के बारे में विधिवत सूचित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि इन दोनों ही घटनाओं में अपनी ड्यूटी के दौरान असाधारण तत्परता दिखाते हुए युवकों की जान बचाने वाले सभी पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की डिजिटल चेतावनियों पर त्वरित तकनीकी प्रतिक्रिया देने से कई बहुमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सकता है। शामली जिले के पुलिस महकमे ने पिछले छह महीनों के दौरान इस तरह के सोशल मीडिया संदेशों पर कार्रवाई करते हुए कुल बत्तीस लोगों की जान बचाई है। इस प्रकार की लगातार सफलताएं यह साबित करती हैं कि तकनीकी सहायता और स्थानीय पुलिस का समन्वय संकट के समय में कितना अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
एसपी ने लोगों से की मानसिक तनाव पर बात करने की अपील
शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने इन घटनाओं के बाद जनता के नाम एक जरूरी संदेश जारी किया है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के गंभीर मानसिक तनाव या पारिवारिक विवाद की स्थिति में कोई भी आत्मघाती कदम उठाने से पूरी तरह बचें। अधिकारी ने लोगों को सलाह दी कि वे ऐसे कठिन दौर में अपने परिजनों, रिश्तेदारों या किसी भी भरोसेमंद इंसान के साथ अपनी बातें खुलकर साझा करें। उनका कहना था कि जिंदगी की मुश्किल घड़ी में अपनों से मदद मांगना और अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके। इन दोनों घटनाओं से यह बात साफ हो गई कि सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा भेजे जाने वाले अलर्ट और स्थानीय पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली किस प्रकार मिलकर काम करती है। समय रहते मिली सटीक सूचना की वजह से ही दोनों युवकों को सही वक्त पर चिकित्सीय और मानवीय सहायता मिल सकी। पुलिस विभाग अब ऐसे मामलों को लेकर और अधिक सतर्क हो गया है ताकि इंटरनेट पर इस तरह के संकेत मिलते ही तुरंत कदम उठाया जा सके। समाज के विभिन्न वर्गों और परिवारों के बीच भी इस बात की चर्चा हो रही है कि कैसे आपसी संवाद की कमी और मानसिक दबाव आज के युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। पुलिस का यह सराहनीय कदम भविष्य में भी ऐसे कई संकटग्रस्त युवाओं के लिए जीवन बचाने का एक बड़ा जरिया साबित हो सकता है।