लोक भवन में संपन्न हुआ चयन पत्र वितरण समारोह
राजधानी लखनऊ के प्रमुख प्रशासनिक केंद्र लोक भवन में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्कृष्ट खेल प्रतिभाओं को सरकारी सेवा के कागजात सौंपे। अधिकारी बनने वाले इन युवाओं की यह यात्रा खेल की पोशाक से शुरू होकर कानून व्यवस्था की वर्दी तक पहुंची है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह दस्तावेज किसी की व्यक्तिगत अनुकंपा या एहसान नहीं हैं, बल्कि यह इन युवाओं के अपने खून पसीने की मेहनत का परिणाम हैं। मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती है और कड़ा परिश्रम हमेशा रंग लाता है। इस अवसर पर नागरिक पुलिस के 43 उप निरीक्षक पदों के युवाओं, 295 आरक्षियों और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी यानी पीएसी के 132 सिपाहियों को उनके चयन पत्र मिले हैं। सरकार द्वारा खेल कोटे के अंतर्गत कुल 866 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती की प्रक्रिया प्रस्तावित की गई है, जिससे राज्य की खेल प्रतिभाओं को सीधा लाभ मिल सके। इन युवाओं को मैदान पर अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर सफलता हासिल हुई है, वैसी ही निष्ठा की अपेक्षा सरकार अब कानून व्यवस्था संभालने के दौरान भी कर रही है।
मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया पर मुख्यमंत्री की दो टूक सलाह
युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इंटरनेट और मोबाइल के दौर की गंभीर समस्याओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आजकल की युवा पीढ़ी अपना बेशकीमती समय सोशल मीडिया की छोटी वीडियो क्लिप देखने में बर्बाद कर देती है। रील बनाने या देखने से केवल कुछ पल के लिए लाइक्स हासिल होते हैं, जबकि खेल के मैदान में पसीना बहाने से असली जिंदगी और पहचान मिलती है। उन्होंने युवाओं से सीधा सवाल किया कि उन्हें डिजिटल दुनिया की काल्पनिक वाहवाही चाहिए या फिर समाज में अपनी वास्तविक उपलब्धि। खेल जगत का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि खिलाड़ियों को मैदान पर तमाम तरह की विपरीत परिस्थितियों और पारिवारिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। जिस प्रकार एक खिलाड़ी मैदान पर मिलने वाली हार से निराश होने के बजाय दोबारा उठकर अभ्यास करता है और अंत में पदक जीतकर लाता है, वैसी ही जिजीविषा पुलिस सेवा में भी रखनी होगी। एक महिला एथलीट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस खिलाड़ी का निशाना अर्जुन की तरह बिल्कुल सटीक था, जिसके परिणामस्वरूप उसने स्वर्ण पदक हासिल किया। इस पूरे आयोजन में खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव और अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके थे।
पुरानी राजनीति पर तंज और खेल क्षेत्र में रोजगार की नई दिशा
राज्य की पिछली व्यवस्थाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश की पहचान आए दिन होने वाली गंभीर आपराधिक वारदातों से जुड़ी होती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और प्रदेश के युवा अपने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पदकों के माध्यम से राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। हत्या और पदक के बीच का अंतर बहुत स्पष्ट है क्योंकि एक तरफ अपराध छवि को डुबोता है तो दूसरी तरफ खेल का तमगा गौरव दिलाता है। पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की नियुक्तियों में केवल सिफारिश और भाईभतीजावाद का बोलबाला रहता था। इसके विपरीत वर्तमान सरकार योग्यता के आधार पर युवाओं को रोजगार दे रही है और अब तक लगभग 10 लाख सरकारी नौकरियां बांटी जा चुकी हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार खेल और खिलाड़ियों को केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सम्मानजनक आजीविका दे रही है। पुलिस महकमे में दो प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान इसी दूरदर्शी सोच का एक ठोस प्रमाण है। अंत में युवाओं को शराब और एक विशेष राजनीतिक दल से सावधान रहने की हिदायत देते हुए उन्होंने कहा कि ये दोनों चीजें प्रदेश के विकास को बाधित करती हैं और शांति का मुखौटा पहनने वालों से हमेशा सतर्क रहना चाहिए।