अपनी पसंद के अनुसार गंतव्य का चयन विश्व पर्यटन दिवस के पावन अवसर पर देश भर के सैलानियों के सामने यात्रा के लिए कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं। जब कोई व्यक्ति सफर पर निकलने का मन बनाता है, तो उसका सबसे पहला सवाल यही होता है कि वह किस तरह की जगहों पर जाना पसंद करेगा। कुछ लोगों को ऊंचे और बर्फीले पहाड़ों की शांत वादियां आकर्षित करती हैं, तो कुछ अन्य लोग नीले समुद्र के किनारे लहरों की आवाज सुनना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, प्रकृति प्रेमियों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी होता है जो घने जंगलों के बीच वन्यजीवों के करीब समय बिताना चाहता है। भारत की भौगोलिक विविधता इस बात की पूरी छूट देती है कि हर यात्री अपने मौजूदा मिजाज और रुचि के हिसाब से अपने लिए सबसे उपयुक्त और आरामदायक डेस्टिनेशन चुन सके। पर्यटन विभाग और विभिन्न यात्रा विश्लेषकों का मानना है कि यात्रियों की इसी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए देश के भीतर कई प्रकार के नए और आधुनिक सर्किट विकसित किए जा रहे हैं, ताकि हर किसी को उसकी पसंद का सुकून मिल सके और उनकी छुट्टियां यादगार बन सकें।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का बढ़ता महत्व भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक बनावट इतनी अनूठी है कि यहाँ एक ही समय में उत्तर में बर्फ से ढकी चोटियाँ, दक्षिण में विशाल समुद्र तट और मध्य भाग में सघन वन क्षेत्र देखने को मिलते हैं। ऐतिहासिक रूप से देखें तो भारत हमेशा से दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। प्राचीन काल से ही यहाँ आने वाले यात्री यहाँ की संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से अभिभूत होते रहे हैं। वर्तमान समय में आधुनिक बुनियादी ढांचे और बेहतर सड़क तथा वायु मार्ग कनेक्टिविटी के कारण देश के दूर-दराज के कोने तक पहुँचना बहुत आसान हो गया है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय स्थल हों, गोवा या केरल के तटीय इलाके हों, या फिर मध्य प्रदेश और असम के राष्ट्रीय उद्यान हों, हर जगह पर्यटकों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयास कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिल रही है।
यात्रा उद्योग पर भविष्य का प्रभाव आने वाले समय में भारतीय पर्यटन क्षेत्र में और अधिक वृद्धि होने की पूरी संभावना है क्योंकि लोग अब पारंपरिक यात्राओं से हटकर अनुभव आधारित पर्यटन को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। जिम्मेदार पर्यटन की अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिसके तहत पर्यटक पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना पसंद करते हैं। इस बदलाव से न केवल प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है बल्कि स्थानीय समुदायों को भी सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुँचता है। यात्रा विशेषज्ञों का सुझाव है कि अपनी अगली छुट्टियों की योजना बनाते समय पर्यटकों को अपने बजट के साथ-साथ पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। पर्यटन दिवस जैसे विशेष अवसर लोगों को अपने देश की विविधता को करीब से जानने और उसकी सराहना करने का एक बेहतरीन मौका प्रदान करते हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में घरेलू पर्यटन में और अधिक तेजी आएगी और देश के कोने-कोने में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिलेगा।