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अनोखी पहल: वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर से बने ईको-फ्रेंडली दीयों की बढ़ी मांग

वाराणसी जिले के पिंडरा ब्लॉक के ग्रामीण कारीगरों द्वारा गोबर से बनाए जा रहे पर्यावरण अनुकूल दीयों को बाजारों में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है, जिससे स्थानीय महिलाओं की आजीविका मजबूत हो रही है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 16:16
अनोखी पहल: वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर से बने ईको-फ्रेंडली दीयों की बढ़ी मांग
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के अंतर्गत आने वाले पिंडरा विकास खंड के एक छोटे से गांव में आज सुबह से ही अजीब सी चहल-पहल देखी जा रही है। यहां की महिलाओं ने स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह से गोबर और प्राकृतिक रंगों से बने दीयों का निर्माण शुरू किया है। आज सत्रह अगस्त को आयोजित एक विशेष ग्रामीण कारीगर मेले में जब इन अनोखे उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, तो शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों ने इसमें गहरी रुचि दिखाई। पारंपरिक मिट्टी के दीयों के मुकाबले ये दीये पूरी तरह से बायो-डिग्रेडेबल हैं और जलने के बाद पौधों के लिए बेहतरीन खाद का काम करते हैं। महिला स्व-सहायता समूह की प्रमुख उर्मिला देवी ने बताया कि इस अभिनव प्रयोग से न केवल ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे रोजगार मिल रहा है, बल्कि प्लास्टिक और अन्य हानिकारक सामग्रियों के उपयोग में भी कमी आ रही है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती

जिला प्रशासन और खादी ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से इन कारीगरों को आधुनिक सांचे और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप दीयों की गुणवत्ता और चमक में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। आज आयोजित विशेष कार्यशाला के दौरान जिला पंचायत अधिकारियों ने घोषणा की कि आगामी पर्वतीय और दीवाली के त्योहारों को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों को बड़े पैमाने पर शहरी बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक क्लस्टर को वित्तीय सहायता और परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है। स्थानीय युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन उत्पादों का प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया है, जिससे ऑनलाइन ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। कारीगरों का कहना है कि पारंपरिक कला के साथ आधुनिक तकनीक का यह मेल उनके जीवन स्तर को सुधारने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के स्थानीय प्रयासों से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलती है क्योंकि इनके निर्माण में किसी भी प्रकार की ऊर्जा खपत या रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं होता। आज स्थानीय पर्यावरणविदों ने कारीगरों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण के लिए यह एक अनुकरणीय उदाहरण है। पंचायत स्तर पर इन उत्पादों के प्रदर्शन के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए हैं, जहां लोग बड़ी संख्या में खरीदारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पहल को पड़ोसी जिलों तक विस्तारित करने की योजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
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