रामलीला मैदान में ग्रेविटी झूले का टूटना
अर्मापुर इस्टेट के रामलीला मैदान में गुरुवार रात एक गंभीर दुर्घटना घटी जब वहाँ लगा ग्रेविटी झूला अचानक टूट गया। इस घटना के बाद मैदान में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई। गुरुवार का दिन रामलीला का आखिरी दिन था और मेले में काफी संख्या में लोग मौजूद थे। झूला अचानक एक तरफ पूरी तरह झुक गया जिससे उस पर बैठे लोगों की जान हलक में आ गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुँच गया। एडीसीपी वेस्ट, एसीपी पनकी और अर्मापुर थाने की पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने फौरन मौके पर पहुँचकर झूले के संचालन से जुड़े अनुमति पत्रों और अन्य जरूरी कागजातों की गहराई से जाँच-पड़ताल शुरू की। गनीमत यह रही कि इस अचानक हुए हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई और सभी लोग सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। बच्चों और अन्य सवार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों ने राहत की साँस ली। मैदान में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और समिति के लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि बड़ा हादसा टल गया है।
सवारियों का बयान और सुरक्षा जाँच पड़ताल
ग्रेविटी झूले पर गुरुवार रात सगे भाई औवेस अली और आरिम अली समेत कुल 14 लोग सवार होकर आनंद ले रहे थे। औवेस अली के मुताबिक झूला शुरू होने के महज 30 सेकंड के भीतर ही एक जोरदार तेज आवाज गूँज उठी। इसके तुरंत बाद झूला खड़खड़ाते हुए एक तरफ को खतरनाक तरीके से झुक गया। हादसे के वक्त सुरक्षा के मद्देनजर झूले की और आसपास की बिजली तुरंत काट दी गई ताकि कोई करंट न फैले। लाइट कटने और झूला झुकने के बाद उसमें बैठे लोगों में दहशत फैल गई और वे मदद के लिए चिल्लाने लगे। इस दुर्घटना में औवेस अली, उनके भाई आरिम अली और दो-तीन अन्य लोगों को मामूली चोटें आने की बात सामने आई है। एडीसीपी वेस्ट के अनुसार प्राथमिक जाँच में यह बात सामने आई है कि झूले का बेस टूटने के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस अब इस तकनीकी पहलू पर भी गंभीरता से जाँच कर रही है कि झूले का समय पर मेंटेनेंस कराया गया था या नहीं। इस झूले की अधिकतम वजन सहन करने की क्षमता 250 किलोग्राम तय की गई थी। हादसे के तुरंत बाद झूला संचालक सत्यपाल सिंह और अन्य संबंधित स्टाफ मौके से फरार हो गए और नदारद मिले।
समिति की प्रतिक्रिया और मैदान के अन्य झूले
श्रीश्री रामलीला महोत्सव समिति की तरफ से अर्मापुर इस्टेट के इस रामलीला मैदान में भव्य आयोजन कराया जाता है। गुरुवार को इस वार्षिक आयोजन का समापन हो चुका था और यह आखिरी दिन का कार्यक्रम चल रहा था। हादसे के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर रामलीला मैदान में लगाए गए बाकी सभी झूलों का संचालन पूरी तरह रोक दिया गया। रामलीला समिति के मीडिया प्रभारी सौरभ सिंह ने बताया कि झूले के संचालन के लिए सभी संबंधित विभागों से जरूरी एनओसी और अनुमतियाँ पूरी तरह प्राप्त की गई थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार झूले की निर्धारित क्षमता के नियमों का पालन करते हुए ही लोगों को उस पर सवार किया गया था। समिति का कहना है कि झूले का अचानक क्षतिग्रस्त होना बेहद खेदपूर्ण है लेकिन गनीमत रही कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। सभी बच्चे और अन्य सवार सुरक्षित हैं और पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न बिंदुओं पर गहराई से जाँच कर रही है। डीसीपी वेस्ट ने इस दुर्घटना की जाँच का जिम्मा संबंधित अधिकारियों को सौंपा है ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके और भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।