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बड़ी सफलता: सरोगेट गंगातीरी गाय ने बीएचयू में साहीवाल बछिया को दिया जन्म

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पशु प्रजनन विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की गई है, जहाँ एक सरोगेट गंगातीरी गाय ने आधुनिक तकनीक की मदद से साहीवाल नस्ल की स्वस्थ बछिया को जन्म दिया है।

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Ankit Yadav
22 अग 2026, 12:59
बड़ी सफलता: सरोगेट गंगातीरी गाय ने बीएचयू में साहीवाल बछिया को दिया जन्म
भारतीय कृषि और पशुपालन क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाली इस घटना ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित पशु चिकित्सा विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र में आधुनिक और उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस अभिनव प्रयोग के माध्यम से न केवल उच्च नस्ल के मवेशियों के संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि भविष्य में दुग्ध उत्पादन और पशु नस्ल सुधार के नए रास्ते भी खुल गए हैं।

आधुनिक प्रजनन तकनीकों का कमाल

इस पूरी प्रक्रिया में अत्याधुनिक पशु प्रजनन विज्ञान और एम्ब्रियो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, गंगातीरी नस्ल की सरोगेट माँ के गर्भ में साहीवाल नस्ल के भ्रूण का रोपण किया गया था, जो पूरी तरह से सफल रहा। जन्म लेने वाली साहीवाल बछिया पूरी तरह स्वस्थ है और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की एक टीम लगातार नवजात और उसकी सरोगेट माँ के स्वास्थ्य पर करीब से नजर बनाए हुए है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके जरिए कम समय में दुर्लभ और अत्यधिक उत्पादक नस्लों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सकेगा। पशु विज्ञान के जानकारों का मानना है कि देश में स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए इस तरह के वैज्ञानिक प्रयोग अत्यंत आवश्यक हैं। आज के समय में जब पारंपरिक पशुपालन को आधुनिक विज्ञान का साथ मिल रहा है, तो परिणाम बेहद सकारात्मक आ रहे हैं। बीएचयू की इस उपलब्धि से पूरे académico जगत में हर्ष का माहौल है और अन्य कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक भी इस मॉडल का अध्ययन करने में रुचि दिखा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में इस तकनीक को और अधिक परिष्कृत किया जाएगा ताकि ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों को इसका भरपूर लाभ मिल सके। इस सफलता के बाद अब कृषि विज्ञान केंद्र और विश्वविद्यालय के शोध संस्थान किसानों के लिए विशेष जागरूकता शिविर आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत प्रजनन तकनीकों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने मवेशियों की नस्ल सुधारने के लिए प्रेरित करना है। जैसे-जैसे इस प्रकार की आधुनिक तकनीकें जमीनी स्तर पर लागू होंगी, देश के ग्रामीण आंचल में पशुपालन अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
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