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छात्र आंदोलन की बड़ी जीत: 56 दिनों के भारी विरोध के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय ने वापस लिया 3 छात्रों का निष्कासन

लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में पिछले 56 दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र यूनियनों के दबाव में निष्कासित तीन छात्रों का निलंबन वापस ले लिया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 17:57
छात्र आंदोलन की बड़ी जीत: 56 दिनों के भारी विरोध के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय ने वापस लिया 3 छात्रों का निष्कासन
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में पिछले लगभग दो महीनों से चल रहा राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध आखिरकार सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हो गया। विश्वविद्यालय के कुलपति और कार्य परिषद की एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक के बाद प्रशासन ने निष्कासित किए गए तीन छात्र नेताओं का निष्कासन आदेश तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया है। यह फैसला परिसर में पिछले 56 दिनों से लगातार चल रहे धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और छात्र संगठनों की एकजुटता के बाद आया है। निष्कासित छात्रों पर परिसर में बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने और प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी, जिसके विरोध में पूरा छात्र समुदाय लामबंद हो गया था।

बातचीत से निकला समाधान और सौहार्दपूर्ण फैसला

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित मध्यस्थता समिति और विभिन्न छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ताएं आयोजित की गईं। छात्रों का तर्क था कि निष्कासन की कार्रवाई अत्यंत कठोर थी और इससे उनका शैक्षणिक भविष्य अंधकारमय हो रहा था। पूर्व छात्रों, शिक्षक संघों और नागरिक समाज के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निलंबन वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि, विश्वविद्यालय ने छात्रों से भविष्य में परिसर की शांति और अनुशासन बनाए रखने का लिखित आश्वासन भी लिया है। इस निर्णय की घोषणा होते ही विश्वविद्यालय के गेट नंबर एक पर छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया।

शैक्षणिक माहौल में सुधार की नई उम्मीद

इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय में पिछले कई हफ्तों से ठप पड़ी शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां एक बार फिर से पटरी पर लौट आई हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने एक बयान जारी कर कहा कि संस्थान का प्राथमिक उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक विकास को सुनिश्चित करना है और विवादों का अंत होने से अब आगामी परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि संवाद और सकारात्मक बातचीत के माध्यम से बड़े से बड़े प्रशासनिक मतभेदों को सुलझाया जा सकता है।
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