धनबाद के विश्वविख्यात कोयला क्षेत्र झरिया में दशकों से भूमि के भीतर सुलग रही आग पर काबू पाने और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने के लिए आज एक नई आधुनिक तकनीकी परियोजना का प्रायोगिक शुभारंभ किया गया। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और केंद्रीय खनन अनुसंधान संस्थान (CSIR-CIMFR) के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने झरिया के एक विशेष प्रभावित जोन में नाइट्रोजन फ्लशिंग और विशेष जियो-पॉलिमर्स का उपयोग करके आग को रोकने का कार्य आरंभ किया है। इस भू-वैज्ञानिक पहल का मुख्य उद्देश्य कोयला खदानों की आग के कारण होने वाले भूस्खलन और जहरीली गैसों के रिساव को रोकना है, जिससे स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वैज्ञानिक तरीकों से आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास
विशेषज्ञों ने बताया कि पारंपरिक तरीकों की तुलना में यह नई तकनीक अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल है। इसके तहत भूमिगत खदानों के रिक्त स्थानों में वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए मिश्रण और नाइट्रोजन गैस को उच्च दबाव के साथ इंजेक्ट किया जाता है, जिससे ऑक्सीजन का संपर्क कट जाता है और सुलगती हुई आग बुझ जाती है। थर्मल इमेजिंग ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग के जरिए भूमि के अंदर के तापमान की लगातार निगरानी भी की जा रही है ताकि सटीक स्थानों पर ही यह उपचार किया जा सके। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के आधार पर इसे पूरे झरिया क्षेत्र में वृहद स्तर पर लागू किया जाएगा।
स्थानीय निवासियों और पुनर्वास प्रक्रिया को मिलेगी गति
झरिया के स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के इस वैज्ञानिक प्रयास का स्वागत किया है। लंबे समय से आग और धुएं के बीच जीवन गुजार रहे लोगों ने उम्मीद जताई है कि इन तकनीकी प्रयासों से उनके जीवन की दुश्वारियां कम होंगी। जिला प्रशासन और खनन कंपनियों के बीच विस्थापित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास को लेकर भी समन्वय बैठकें तेज कर दी गई हैं। इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल बहुमूल्य कोकिंग कोल संसाधनों की बर्बादी रुकेगी, बल्कि इस पूरे औद्योगिक क्षेत्र का पर्यावरण भी सुधर सकेगा।