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लखनऊ में देश का पहला समर्पित स्नेक वेनम सेंटर: कुकरैल में स्थापित होगी हाई-टेक शोध लैब

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के कुकरैल अरण्य क्षेत्र में राज्य का पहला समर्पित स्नेक वेनम एक्सट्रैक्शन और रिसर्च सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 16:26
लखनऊ में देश का पहला समर्पित स्नेक वेनम सेंटर: कुकरैल में स्थापित होगी हाई-टेक शोध लैब

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और सर्पदंश (सांप के काटने) से होने वाली मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। वन एवं वन्यजीव विभाग की शुरुआती अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर राज्य में पहला सरकारी स्नेक वेनम एक्सट्रैक्शन सेंटर (विष निष्कर्षण केंद्र) स्थापित करने का फैसला लिया गया है। यह केंद्र भारत में सरकारी स्तर पर संचालित ऐसे गिने-चुने आधुनिक संस्थानों में से एक होगा, जो उत्तर प्रदेश को एंटी-वेनम के निर्माण और आपूर्ति में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगा।

एंटी-वेनम निर्माण और वैज्ञानिक अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा इस केंद्र की स्थापना का मूल उद्देश्य प्रदेश में सर्पदंश के कारण असमय होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाना है। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • एंटी-वेनम का बड़े स्तर पर निर्माण: स्थानीय प्रजाति के विषैले सांपों से वैज्ञानिक पद्धति द्वारा विष निकालकर उच्च गुणवत्ता वाले एंटी-वेनम सीरम का उत्पादन किया जाएगा।

  • विष के असर पर विस्तृत शोध: अलग-अलग क्षेत्रों में पाए जाने वाले सांपों के विष के प्रभाव, उसकी संरचना और मानव शरीर पर पड़ने वाले दुष्परिणामों पर गहन रिसर्च की जाएगी।

  • स्थानीय विष के अनुसार दवा का विकास: भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार सांपों के जहर में भिन्नता होती है। स्थानीय सांपों के विष से बनी दवा मरीजों पर ज्यादा तेजी से और असरदार तरीके से काम करेगी।

दूसरे राज्यों पर निर्भरता होगी पूरी तरह खत्म फिलहाल उत्तर प्रदेश को जीवनरक्षक एंटी-वेनम की आपूर्ति के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस वजह से कई बार सुदूर ग्रामीण इलाकों में समय पर दवा न पहुंचने के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। नया केंद्र शुरू होने से राज्य को सीधे तौर पर कई लाभ मिलेंगे:

  • सस्ती और त्वरित उपलब्धता: प्रादेशिक स्तर पर उत्पादन होने से दवाइयां कम लागत में तैयार होंगी, जिससे आम जनता को ये बेहद किफायती दरों पर आसानी से मिल सकेंगी।

  • समय की बचत: जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक दवा की आपूर्ति में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा, जिससे आपातकाल में तुरंत इलाज संभव होगा।

  • राज्य को आत्मनिर्भरता: एंटी-वेनम के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर रहने की जरूरत समाप्त हो जाएगी।

सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन की योजना परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों का ध्यान रख रहा है। इस केंद्र के बनने से न केवल जनस्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और बायो-मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश एक नई मिसाल कायम करेगा।

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